नई दिल्ली। सोमवार को एक तरफ देश जहां आजादी का जश्न मना रहा था वहीं, दूसरी तरफ कुछ नौजवान भूख के खिलाफ आजादी की लड़ाई लड़ रहे थे। जी हां, अपने देश में और देश के बाहर एक ऐसी संस्था काम करती है जो बिना किसी लोभ-लालच के जरूरतमंदों को खाना पहुंचाती है। इस संस्था का नाम है रॉबिन हुड आर्मी। यह संस्था दिल्ली में स्थित है लेकिन इस संस्था के सदस्य देश के कई शहरों के अलावा पाकिस्तान के कराची तक में आपको मिल जाएंगे।
दोनो देशों के आजादी के दिन गरीबों को खिलाया खानास्वतंत्रता दिवस के दिन इस संस्था ने लगभग भारत और पाकिस्तान में कुल मिलाकर पांच लाख गरीबों को खाना खिलाने का लक्ष्य तय किया था। पाकिस्तान के आजादी के दिन इस संस्था ने अपने टीम मेंबर के साथ गरीबों को खाना खिलाया औऱ सोमवार को भारत में इस संस्था ने गजब का काम किया।
कौन काम करते हैं इस संस्था मेंरॉबिन हुड आर्मी के वॉलेंटियर्स देश के हर हिस्से में फैले हुए हैं। इस संस्था में काम करने वाले लोग नौकरीपेशा है। ये लोग अपने-अपने इलाकों में रेस्टोरेंट औऱ लोगों से संपर्क साधते है। रेस्टोरेंट आदि में बच जाने वाला खाना ये संस्था ले लेती है। इन्हीं खानों को गरीब और जरूरतमंद लोगों में बाट दिया जाता है।
ऐसे काम करती है रॉबिन हुड आर्मीरविवार और छुट्टी के दिन ये रेस्टोरेंट्स खासतौर पर भी इनके लिए अलग से खाना बनाते है। एक वालंटियर रेस्टॉरेन्ट में जाता है और खाली कन्टेनर में रेस्टॉरेन्ट की तरफ से स्पेशल बनाए गए दाल चावल लेकर चला जाता हैं, जिसके बाद ये मीटिंग प्वाइंट पर आते है और वहां से अलग-अलग टीम अलग-अलग इलाकों में ये खाना गरीबो तक पहुंचाती है। ये लोग स्लम एरिया में बच्चों और जरूरतमंदो को भी खाना बांटते हैं।
रॉबिन हुड के नाम पर है संस्था का नामइस संस्था का नाम रॉबिन हुड के नाम पर इसलिए रखा गया है क्योंकि रॉबिन हुड अमीरों के यहां चोरी करके गरीब लोगों की मदद किया करता था। ‘रॉबिन हुड आर्मी’ नाम की ये संस्था अपनी मर्जी से मदद करने वाले लोगों की मदद से जरूरतमंदों को खाना पहुंचाती है।

2014 में दिल्ली से हुई शुरूआतअसल में इस संस्था को शुरू करने वाले नील घोष और आनंद सिन्हा पुर्तगाल में रहते थे। जहां इस तरीके से गरीबों को खाना दिया जाता था। इसके बाद इन्होंने साल 2014 में दिल्ली से इसकी शुरुआत की और आज पूरे देश में लोग बढ़ चढ़कर खासकर सोशल साइट्स से इसके बारे में जानकर गरीबो को खाना देने में अपना योगदान दे रहे है।
इसी तरह नील घोष के पुर्तगाल के साथी जो पाकिस्तान के रहने वाले है वो पाकिस्तान में इस तरह का प्रोग्राम चला रहे है। चाहे हिंदुस्तान हो या पाकिस्तान गरीबी दोनों देशो में है। जिस तरीके से दोनों देशो में गरीबो को खाना पहुंचाया जा रहा है वो काबिले तारीफ़ है।
