जब शनिवार को बैठक में हाफ पैंट को बदलने का निर्णय लिया जा रहा था, तो कुछ सदस्यों ने पैंट का रंग बदलने के फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा। एक वरिष्ठ कार्यकर्ता का कहना है कि खाकी रंग एक प्रतीक है, जिसे नहीं बदला जाना चाहिए। ठीक उसी प्रकार से जैसे नीले रंग को दलितों से जोड़कर देखा जाता है, वैसे ही यह संघ का राजनीतिक प्रतीक है। अभी तक खाकी पैंट के साथ काली टोपी, सफेद शर्ट, भूरे मोजे और बांस का डंडा आरएसएस के पारंपरिक परिधान में शामिल रहे हैं, जिन्हें गणवेश कहा जाता है। शनिवार को इससे पहले जब यह खबर आई थी कि खाकी पैंट की जगह आरएसएस के स्वयंसेवक ग्रे रंग की पैंट पहनेंगे, तो इन खबरों को आरएसएस ने बेबुनियाद बताया था।