15 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

संस्कृत के छात्रों को भी मिलेगी आयुर्वेद चिकित्सक की डिग्री

साढ़े सात वर्ष का होगा पाठ्यक्रम, सीएसयू रहेगा नोडल एजेंसी आयुर्वेद गुरुकुल संबद्धता पोर्टल लांच

2 min read
Google source verification

नई दिल्ली। संस्कृत के माध्यम से आयुर्वेद में रुचि रखने वाले विद्यार्थी कक्षा 11 से ही आयुर्वेद का अध्ययन कर आयुर्वेद चिकित्सक बन सकेंगे। इसके लिए नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (एनसीआईएसएम) एक विशेष पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है जिसे केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की ओर से संचालित किया जाएगा। इसके लिए अलग से प्रवेश परीक्षा होगी और छात्र दसवीं कक्षा के बाद इसमें प्रवेश ले सकेंगे। इसके तहत दो वर्ष का प्री आयुर्वेद पाठ्यक्रम, साढ़े चार वर्ष का बीएएमएस व एक साल की इंटर्नशिप होगी।

केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नीट की तर्ज पर प्री–बीएएमएस आयुर्वेद प्रोग्राम एंट्रेंस टेस्ट (पीएपी नीट) की प्रवेश परीक्षा आयोजित करेगा। आयुर्वेद गुरुकुलों को मान्यता प्रदान देने का कार्य भी नोडल एजेंसी के रूप में केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय करेगा। विश्वविद्यालय के विभिन्न परिसरों में आयुर्वेद गुरुकुलम् कार्यक्रम प्रारम्भ होगा जिसकी शुरुआत नासिक, व दिल्ली परिसर से होगी। बाद में अन्य परिसरों में भी इसे शुरू किया जाएगा। यह कार्यक्रम एनसीआईएसएम के प्री आयुर्वेद प्रोग्राम और बीएएमएस फ्रेमवर्क के तहत संचालित होगा। यह कुल साढ़े सात वर्ष का पाठ्यक्रम होगा। इसमें 2 वर्ष का प्री–आयुर्वेद कार्यक्रम, साढ़े चार वर्ष का बीएएमएस तथा एक वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप सम्मिलित होगी। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (सीएसयू) के कुलपति प्रो.श्रीनिवास वरखेड़ी एवं एनसीआईएसएम की अध्यक्ष डॉ. मनीषा कोठेकर ने मंगलवार को आयुर्वेद गुरुकुलम एफिलिएशन पोर्टल की शुरुआत की और आयुर्वेद गुरुकुलों की मान्यता के लिए लिए विस्तृत दिशा-निर्देशों भी जारी किए।

गुरुकुल प्रणाली से होगी शिक्षा

यह पहल आयुर्वेद में शास्त्रीय प्रामाणिकता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं पारदर्शिता को नई दिशा देगी। आयुर्वेद का संस्कृत से गहरा अविभाज्य संबंध है तथा संस्कृत के बिना आयुर्वेद दर्शन, शरीर-विज्ञान और चिकित्सा सिद्धांतों को समग्र रूप से समझना संभव नहीं है। यह पाठ्यक्रम भारतीयता, आधुनिक तकनीक, कौशल विकास और तत्त्वज्ञान के समन्वय से विद्यार्थियों को समग्र शिक्षा प्रदान करेगा। गुरुकुल आधारित मॉडल भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करेगा।

डॉ. मनीषा कोठेकर, अध्यक्ष, एनसीआईएसएम

आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि जीवन शैली है, जिसकी जड़े संस्कृत शास्त्रों में निहित हैं। नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप यह पहल परंपरा एवं नवाचार के संतुलन का सशक्त उदाहरण है। आयुर्वेद, संस्कृत, दर्शन, योग और संहिता ये सभी एक-दूसरे के पूरक हैं और गुरुकुल प्रणाली के माध्यम से इनका समन्वित अध्ययन संभव हो सकेगा।

- प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी, कुलपति, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय