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नई दिल्ली। जैन समाज की
सदियों पुरानी प्रथा "संथारा" (मृत्यु होने तक उपवास) पर राजस्थान हाई कोर्ट की रोक
का मामला सुप्रीम कोर्अ पहुंच गया है। याचिकाकर्ता धवल जीवन मेहता ने सुप्रीम कोर्ट
में याचिका दायर करके हाई कोर्ट के फैसले को निरस्त करने की मांग की है। इस याचिका
की सुनवाई अगले सप्ताह के शुरू में होने की संभावना है।
हाई कोर्ट ने
संथारा प्रथा को आत्महत्या करार देते हुए इस पर रोक लगाने का आदेश दिया था। संथारा
जैन समुदाय की सदियों पुरानी प्रथा है, जिसमें यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि उसकी
मौत निकट है तो वह खाना-पीना छोड़ देता है और मौत होने तक मौन व्रत रख लेता है।
दरअसल, हाई कोर्ट ने जैनों के धार्मिक रिवाज "संथारा"को अवैध बताते हुए उसे
भारतीय दंड संहिता की धारा 306 तथा 309 के तहत दंडनीय करार दिया था। कोर्ट ने कहा
था कि संथारा जैन धर्म का आवश्यक अंग नहीं है। इसे मानवीय नहीं कहा जा सकता,
क्योंकि यह मूल मानवाधिकारों का उल्लंघन करता है।
हाई कोर्ट ने निखिल सोनी
की याचिका पर गत 11 अगस्त को यह फैसला सुनाया था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि संथारा
के लिए प्रेरित करने वालों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया
जाएगा।
गौरतलब है कि सकल जैन समाज ने धर्म बचाओ आंदोलन समिति के बैनर तले
सोमवार को राजस्थान में विशाल मौन जुलूस निकाला था। मौन जुलूस का समर्थन जैन समाज
की सभी संस्थाओं ने किया था।
Published on:
25 Aug 2015 10:51 pm
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