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नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी को लेकर दिशानिर्देश जारी करने के लिए सरकार को निर्देश देने की मांग की गई थी। न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति आर भानुमति और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की पीठ ने कहा कि यह याचिका कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
याचिकाकर्ता पर 25 हजार का जुर्माना भी लगा
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सर्वोच्च न्यायालय बार एसोसिएशन में चार सप्ताह के अंदर जुर्माने के तौर पर 25 हजार रुपए जमा करने के निर्देश दिए। यह याचिका रिपक कंसल ने दाखिल की थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि निजी अस्पताल बेवजह सिजेरियन सर्जरी करते हैं। याचिकाकार्ता ने अपनी याचिका में कहा कि ऐसे कई उदाहरण है जिसमें भारत के निजी अस्पताल केवल पैसे कमाने के लिए बिना चिकित्सीय कारणों से सिजेरियन ऑपरेशन करते हैं।
कई बार उठ चुके हैं इस तरह के मामले
निजी अस्पतालों में कमाई के चक्कर में बिल बढ़ाने के लिए जबर्दस्ती की दवाइयां लिखना, गैरजरूरी चिकित्सा प्रक्रियाएं अंजाम देना, जरूरत से ज्यादा दिन अस्पताल में भर्ती करना आदि जैसे आरोप लगाने के मामले सामने आते रहते हैं। हालांकि सभी अस्पतालों में ऐसा नहीं होता लेकिन कई जगहों से शिकायतें सामने आती हैं। कई दफा आम लोगों ने आरोप लगाए हैं कि अस्पतालों ने पैसे के चक्कर में उनके अपनों की जिंदगी से खिलवाड़ किया है, क्योंकि गैरजरूरी दवाओं और अन्य तरह के इलाज से मरीज के शरीर पर नकारात्मक असर पड़ता है। इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ता है।
Published on:
03 Aug 2018 05:11 pm

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