
जयपुर। राजस्थान के स्कूलों के पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। शुरूआत
इतिहास विषय से हो रही है। इसमें कक्षा 6, 7 और 8 की पुस्तकों में आगामी सत्र
2015-16 के लिए पांच नए पाठ जोड़े गए हैं। आगामी शिक्षा सत्र में पाठ्यक्रमों में
बदलाव नहीं हो सका था और छपाई हो चुकी थी। इसका हल निकाल पूरक के रूप में महाराणा
प्रताप, दुर्गादास राठौड़, महाराजा सूरजमल, वीर सावरकर और हेमू कालाणी के पाठ जोड़े
गए हैं। शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी ने रविवार को यहां शिक्षा संस्कृति
उत्थान न्यास, दिल्ली की ओर से आयोजित संगोष्ठी के समापन अवसर पर ये जानकारी दी।
देवनानी ने कहा कि उन्हें लंबे समय से पीड़ा थी आखिर अकबर महान क्यों? अब महारणा
प्रताप महान हैं ये पढ़ाया जाएगा।
भगवा त्याग का प्रतीक
पाठ्यक्रम
विसंगतियों में बदलाव पर देवनानी बोले कि ये भगवाकरण नहीं। भगवा तो त्याग-समर्पण का
प्रतीक है। बदलाव तभी सार्थक होगा जब शिक्षक इसे पढ़ाएंगे। सूर्य नमस्कार, नैतिक
शिक्षा में समस्याएं आ रही हैं लेकिन जो बदलाव करने हैं वे जरूर किए जाएंगे। न्यास
महासचिव अतुल कोठारी ने कहा, स्कूलों के साथ उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों में बदलाव की
जरूरत है। जैसे मैकाले ने बदलाव किया था फिर उसी स्तर का बदलाव होना चाहिए। भारतीय
संस्कृति और हमारी पद्धति को स्थापित करना होगा। संघ लोक सेवा आयोग की पूर्व सदस्य
शिक्षाविद् प्रकाशवती ने अध्यक्षता की, आयोजन संयोजक सूर्यप्रताप सिंह राजावत और
अध्यक्ष एस. एस. बिस्सा ने भी विचार रखे। तकनीकी सत्रों में राजस्थान विवि के शोध
निदेशक प्रो. एन. के. पाण्डेय सहित देश के कई राज्यों से आए विशेषज्ञों ने चर्चा
की।
पहले वामपंथी तैयार करते थे कोर्स
देवनानी ने कहा, राजस्थान राज्य
शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (एसआईईआरटी) में लंबे समय तक वामपंथी
विचारधारा के लोगों का दबदबा था। वे अपने हिसाब से पाठ्यक्रम तैयार करते थे। ये
बिना पड़ताल के लागू हो जाता था। अब कुछ सख्ती की जा रही है।
Published on:
06 Apr 2015 10:48 am
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