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माता-पिता के पास नहीं थे बेटी की शादी के लिए पैसे, भगवान ने दान कर दी करोड़ो रूपए की सम्पत्ति

पिछले एक साल में करीबन ढ़ाई हजार बेटियों के हाथ इन शक्तिपीठों की मदद से पीली की गई।

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Chintapurni

नई दिल्ली। हम जब भी किसी मंदिर या किसी धार्मिक स्थल में जाते हैं तो अपनी क्षमतानुसार चढ़ावा करते हैं। भक्तों द्वारा चढ़ाई गई इस राशि से मंदिर की सेवा और उनसे जुड़ी रखरखाव का काम किया जाता है, लेकिन आज हम आपको शिमला के कुछ ऐसे शक्तिपीठों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके यहां के चढ़ावे से पिछले कई सालों से गरीब बेटियों की शादी की व्यवस्था की गई।

पिछले एक साल में ही करीबन ढ़ाई हजार बेटियों के हाथ इन शक्तिपीठों की मदद से पीली की गई। इन शक्तिपीठों में नयना देवी, ज्वालाजी, बज्रेश्वरी देवी, चिंतपूर्णी, चामुंडा देवी और छिन्नमस्तिका धाम है और इन पीठों से अब तक कुल 6.74 करोड़ रूपये की आर्थिक अनुदान दी गई है।

साल 2017 में 1 करोड़ 92 लाख 29 हजार रूपए की राशि दी गई और इस रकम से ढ़ाई हजार बेटियों की शादी करवाई गई और सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि मंदिर न्यासों की तरफ से एक लाख रूपए अतिरिक्त दिए जाते हैं ताकि उस रकम से गरीबों का इलाज हो सके।

ज्वालाजी मंदिर के अधिकारी राकेश शर्मा इस बारे में कहते हुए बताते हैं कि साल 2012 से 2017 तक मंदिर न्यास की ओर से एक करोड़ सात लाख रूपए का आर्थिक अनुदान दिया गया जिससे 2190 लड़कियों की शादी कराई गई।

वहीं बज्रेश्वरी मंदिर के अधिकारी सुरेंद्र धीमान ने कहा कि साल 2010 से 2017 के बीच मंदिर न्यास के पास 1273 आवेदन आए और करीब 47 लाख 90 हजार रूपए देकर उनकी सहायता दी गई। इसके अतिरिक्त मंदिर न्यास की ओर से बेटियों को 5100 रूपए से 15,000 रूपए तक का शगुन दिया जाता है।

इस क्रम में चिंतपूर्णी मंदिर के अधिकारी प्रेम लाल शर्मा ने बताया कि साल 2008 से 2017 तक 6526 कन्याओं के विवाह के लिए मंदिर की ओर से चार करोड़ बारह लाख 78 हजार रूपए की सहायता राशि दी गई। इसके अतिरिक्त गरीबों के इलाज के लिए एक लाख रूपए तक की आर्थिक सहायता दी जाती है।

नयना देवी मंदिर की ओर से साल 2008 से 2017 तक एक करोड़ 58 लाख 21 हजार 700 रूपए की राशि दी गई जिसका उपयोग 2754 लड़कियों के विवाह के लिए किया गया।

गृजेश चौहान जो कि चामुंडा देवी मंदिर के अधिकारी है उनका इस बारे में कहना है कि साल 2008 से 2017 तक 872 लड़कियों की शादी के लिए 49 लाख 21 हजार 700 रूपए दिए गए। इस संदर्भ में बता दें कि इन मंदिरों से आर्थिक सहायता प्राप्त करने के लिए पहले संबंधित जिला उपायुक्त के पास आवेदन करना होता है और इसके बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाती है।


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