
नई दिल्ली। आजाद भारत के पहले मतदाता हिमाचल विधानसभा चुनाव के श्याम शरण नेगी इस बार भी अपने मताधिकारा का प्रयोग करने के लिए तैयार हैं। 100 साल की उम्र में भी श्याम शरण नेगी अपने वोट को लेकर उत्साहित हैं लेकिन अब चलने फिरने में असमर्थ हैं। नेगी की परेशानी को देखते हुए चुनाव आयोन उनके लिए कुछ विशेष प्रबंधन करने जा रहा है।
वोट डालने के लिए स्पेशल गाड़ी
भारत के आजादी के बाद हर बार चुनाव में वोट देने वाले नेगी के लिए चुनाव आयोग ने एक गाड़ी की व्यवस्था की है ताकि उन्हें बूथ तक ले जाया जा सके। हर बार की तरह इस बार भी नेगी जिस बूथ पर वोट डालते हैं वहां उनके स्वागत के लिए खास इंतजाम हो रहा है। नेगी के लिए पोलिंग बूथ पर रेड कारपेट बिछाया जाएगा।
देश के लिए इमानदार को दे वोट
नेगी चाहते हैं कि आगामी चुनाव में कोई भी वोट डालने से न चूके। नेगी कहना है कि मतदाताओं को अपने मताधिकार का प्रयोग जरूर करना चाहिए और सरकार की बागडोर ईमानदार नेता के हाथ में सौंपनी चाहिए जो देश से भ्रष्टाचार को मिटाने की कुव्वत रखता हो और महंगाई के बढ़ने पर भी रोक लगा सके।
गूगल ने बनाया था वीडियो
श्याम शरण नेगी उस वक्त सुर्खियों में आए थे जब 2014 लोकसभा चुनाव में गूगल ने उनपर एक वीडियो बनाया था। इस वीडियो में नेगी ने अपने पहले वोट की कहानी सुनाते नजर आए थे।
1951 के पहले लोकसभा में की थी वोटिंग
रसीले सेबों के लिए मशहूर किन्नौर जिले के एक सुदूर गांव में रहने वाले नेगी के परिवार में पत्नी, चार बेटे और पांच बेटियां हैं। उन्होंने कहा कि मतदान करना जरूरी है। एक सरकारी शिक्षक के रूप में 1975 में सेवानृवित्त हुए नेगी आजाद भारत में चिन्नी निर्वाचन क्षेत्र में अक्टूबर 1951 को हुए पहले लोकसभा चुनाव में वोट डालने वाले मतदाताओं में से हैं। बाद में इसका नाम किन्नौर कर दिया गया। उस समय बर्फ से ढके इस क्षेत्र में मतदान देश और राज्य के दूसरे निर्वाचन क्षेत्रों से पहले कराया जाता था। उम्र के तकाजे से कम देखने और सुनने के बावजूद नेगी अब भी अपने आप चल-फिर लेते हैं। 2014 लोकसभा चुनाव में उनसे 10 साल छोटी उनकी पत्नी हीरा मणि उनके साथ वोट डालने मतदान केंद्र जाएंगी। मतदान केंद्र उनके घर से लगभग एक किलोमीटर दूर है।
मैं जानता हूं EVM से वोटिंग कैसे होती है
नेगी ने कहा कि मेरी आंख की रोशनी जा रही है, मेरा शरीर साथ नहीं दे रहा, लेकिन मैं यह जानता हूं कि ईवीएम मशीन में वोट कैसे डालते हैं। मैं मतदाता सूची पत्र पर अपने हस्ताक्षर भी स्वयं करता हूं।
नेहरु का दिया था वोट
आजाद भारत के पहले लोकसभा चुनाव को याद करते हुए नेगी कहते हैं कि उस वक्त मैंने जवाहर लाल नेहरू को वोट दिया था। लेकिन बाद में मैंने दूसरी पार्टी को वोट दिया, जिसने बेहतर शासन लाने का वादा किया। हालांकि उन्होंने दूसरी पार्टी का खुलासा नहीं किया। नेगी कहते हैं कि हाल के वर्षो में यही सुनने को मिलता है कि नेता भ्रष्ट हैं। कोई भी पार्टी असल नीतियों के साथ लोगों के पास नहीं जातीं। नेता सदन में गंभीर और प्रासंगिक मुद्दों पर चर्चा नहीं करते और हंगामा करके सदन का समय बर्बाद करते हैं।
Published on:
29 Oct 2017 02:22 pm
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