
पत्रिका फैक्ट चेक: तीन दशक तक काम करने वाले श्रमिकों को श्रम मंत्रालय से मिलेगी आर्थिक मदद, जानिए सच्चाई
नई दिल्ली। लॉकडाउन को लेकर श्रमिकों के सामने रोजगार और रोजी रोटी का संकट खड़ा है। बड़े शहरों में काम धंधा बंद होने से बड़ी संख्या में श्रमिक अपने गांवों की ओर लौट रहे हैं। हालांकि प्रधानमंत्री ने पीएम केयर्स फंड से श्रमिकों के लिए 1000 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता दी है। साथ ही सरकार अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है।
वहीं सोशल मीडिया पर एक खबर तेजी से वायरल हो रही है । वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है श्रम मंत्रालय में तीन दशक तक काम करने वाले श्रमिक को मंत्रालय से 1 लाख 20 हजार रुपए मिलेगा। इस खबर के बाद श्रमिकों कौतुहल बना हुआ है।
दावा- श्रमिकों को मंत्रालय से 1 लाख 20 हजार रुपए मिलेगा
तथ्य- मंत्रालय द्वारा नहीं किया गया ऐसा कोई ऐलान
क्या है वायरल मैसेज
पत्रिका के व्हाट्स नंबर पर एक जागरूक पाठक ने यह मैसेज भेजकर सच्चाई जानने की कोशिश की कि क्या सच में लॉकडाउन के दौरान श्रम विभाग में काम करने वाले श्रमिकों को मंत्रालय पैसा देगा। दरअसल व्हाट्स एप ग्रुप पर मैसेज वायरल हो रहा है । वायरल मैसेज में दावा किया जा रहा है कि 1990 से 2020 तक जिस श्रमिकों ने अपनी सेवा दी है, वह श्रम मंत्रालय से 1 लाख 20 हजार रुपए लेने के हकदार हैं। बकायदा एक वेबसाइट की URL भी दी गई है। https://ll.lllll.shop जिसमें कहा जा रहा है कि इसपर आप अपना नाम चेक कर सकते हैं और इसका फायदा उठा सकते हैं। बहुत लोगों को इसका लाभ मिल भी चुका है।
क्या है वायरल मैसेज की सच्चाई?
पत्रिका फैक्ट चेक टीम ने जब इसकी पड़ताल शुरू की। फैक्ट चेक टीम ने सबसे पहले लेबर मिनिस्ट्री की वेबसाइट को खंगाला जहां ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया था। उसके बाद गृह मंत्रालय की वेबसाइट को भी छान मारा वहां पर भी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं थी। इसके बाद मैसेज को गूगल पर अडवांस्ड सर्च टूल इस्तेमाल किया उसमें भी ऐसी कोई जानकारी नहीं दी गई थी। मालूम चला कि यह मैसेज पूरी तरह फेक है। सच से इसक कोई वास्ता नहीं है।
पत्रिका ने अपने पाठकों से अपील करता है कि वह इस तरह के प्रोपगेंडा पर भरोसा नहीं करें। सच और पक्की खबर देखने के लिए सिर्फ और सिर्फ पत्रिका डॉट कॉम और पत्रिका मोबाइल ऐप का ही इस्तेमाल करें।
PIB ने खबर को गलत बताया
वहीं प्रेस इन्फॉरमेशन ब्यूरो ने भी इस खबर को पूरी तरह से गलत करार दिया है। पीआईबी ने बताया कि सरकार ने ऐसी कोई घोषणा नहीं की है। इस तरह की फर्जी वेबसाइटों से सावधान रहें।
Published on:
14 May 2020 02:53 pm
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