
नई दिल्ली। श्रीनगर एयरपोर्ट के पास स्थित बीएसएफ कैंप पर आत्मघाती हमले को लेकर सुरक्षा एजेंसियां इस तरह की भी आशंका जता रही हैं कि आतंकियों के निशाने पर राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनआईए) के वे अफसर हो सकते हैं, जो आतंकवादियों की विदेशी फंडिंग की जांच कर रहे हैं। अमूमन एनआईए के बड़े अफसर इस कैंप में रुका करते थे।
गृहमंत्री ने लिया हालात का जायजा
मंगलवार को गृह मंत्रालय में इस संबंध में हाईलेवल बैठक हुई। वहीं गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सीमा सुरक्षा बल और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के प्रमुखों से फोन पर बात कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने इस आतंकी हमले को नाकाम करने के लिए सुरक्षा बलों की तारीफ की। सुरक्षा मामलों के जानकार यह सवाल भी उठा रहे हैं कि अति सुरक्षित स्थान होने के बाद भी आखिर आतंकवादी इतने नजदीक पहुंच कैसे गए। ये बीएसएफ कैंप एयरफोर्स स्टेशन और श्रीनगर हवाई अड्डे के पास है। इस हमले के बाद एयरपोर्ट को बंद कर दिया गया था। हालांकि बाद में विमान सेवा दोबारा शुरू कर दी गई थी।
जैश ने ली हमले की जिम्मेदारी
गृह मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि खुफिया एजेंसियों ने जैश के हमले की जानकारी दी थी। एजेंसियों से इनपुट था कि जैश ने दो दर्जन से ज्यादा फिदायिन भेजे हैं। यह घुसपैठ अगस्त के आखिर में जम्मू सेक्टर से हुई। मगर सुरक्षा मामलों के जानकार सवाल यह उठा रहे हैं कि जम्मू से श्रीनगर तक ये आतंकवादी कैसे पहुंचे। हालांकि मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा बल चौकस थे इसलिए पहला आतंकी बाहर बैरिकेट में मारा गया। बाकी दो आतंकी ग्रेनेड फेंककर अंदर आने में कामयाब हो गए। सूत्रों का कहना है कि स्थानीय आतंकियों की कमर टूटने से लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादियों संगठन बैचैन है। इसलिए विदेशी आतंकियों की मदद ली जा रही है। आतंकवादियों के निशाने पर एनआईए अफसर हो सकते हैं। हालांकि इसकी अधिकारिक पुष्टि नहीं की गई।
कैसे कैंप के पास पहुंचे आतंकी?
बीएसएफ के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक पीके मिश्रा ने मामले में कहा कि सवाल यह है कि इतनी सुरक्षा होने के बावजूद आतंकवादी इतने नजदीक कैसे पहुंच गई। सुरक्षा में इस चूक का पता लगाकर तकनीकी उपाय के जरिए इसे सुधारने की जरूरत है। साथ ही जब पता था कि वहां आवासीय कॉलोनी भी है और वहां से आतंकवादी आ सकते है तो वहां सुरक्षा व्यवस्था क्यों सख्त नहीं रखी गई। आतंकवादियों की कमर तोडऩे से उनके खेमे में हताशा है। भारत ने यूएन में भी आतंवादियों और उनकी मदद करने वाले पाकिस्तान का पर्दाफाश कर दिया है। साथ ही अलगाववादियों पर शिकंजा कस रहा है। इसलिए ये आतंकी घटनाये उसी बेचैनी की झलक है।
Published on:
03 Oct 2017 08:54 pm
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