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CLAT परीक्षा को रद्द करने के लिए छात्रों ने दी याचिका, SC ने कहा- 27 मई तक पैनल में करें शिकायत

SC ने शिकायत करने वाले अभ्यर्थियों से कहा है कि वे NUALS द्वारा गठित दो सदस्यीय समिति के पास 27 मई को शाम सात बजे तक शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

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CLAT Exam 2018

CLAT परीक्षा को रद्द करने के लिए छात्रों ने दी याचिका, SC ने कहा- 27 मई तक पैनल में करें शिकायत

नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत ने 13 मई की CLAT (Common Law Admission Test) की ऑनलाइन परीक्षा में खामियों के बारे में शिकायत करने की इजाजत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने शिकायत करने वाले अभ्यर्थियों से कहा है कि वे नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ एडवांस्ड लीगल स्टडीज द्वारा गठित दो सदस्यीय समिति के पास 27 मई को शाम सात बजे तक ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं। बता दें कि CLAT ऑनलाइन परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर शिकायतें सुनने और उनके निवारण के लिए हाईकोर्ट के सेवानिवृत न्यायाधीश एम आर हरिहरन नायर की अध्यक्षता में दो सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। यह समिति परीक्षा में शामिल हो रहे छात्रों की शिकायतों को सुनेगी और उसका समाधान करेगी। आपको बता दें कि न्यायमूर्ति एएम खानविल्कर व न्यायमूर्ति इंदू मल्होत्रा की पीठ ने गत 13 मई को हुई ऑनलाइन CLAT परीक्षा में गड़बडि़यों की शिकायतों से संबंधित याचिका पर सुनवाई के बाद दी है।

कमेटी 30 मई को कोर्ट में रिपोर्ट पेश करेगी

गौरतलब है कि अदालत में सुनवाई के दौरान सेवानिवृत न्यायाधीश को कमेटी का अध्यक्ष घोषिच करते हुए कोर्ट ने कहा कि कमेटी परीक्षा में शामिल हो रहे हर छात्रों की शिकायत और ज्ञापन पर विचार करेंगे। इसके अलावे विद्यार्थी 27 मई शाम 7 बजे तक कमेटी को ऑनलाइन शिकायत कर सकते हैं। कमेटी 29 मई तक सभी शिकायतों की जांच-पड़ताल और सुनने के बाद 30 मई को सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। जबकि परीक्षा का परिणाम 31 मई को घोषित किए जाएंगे।

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छात्रों ने परीक्षा रद्द करने की मांग की है

आपको बता दें कि CLAT की परीक्षा में तकनीकी गड़बडियों को देखते हुए कुछ छात्रों ने आरोप लगाते हुए मांग की है कि 13 मई को हुई प्रवेश परीक्षा रद्द की जाए। छात्रों ने कहा है कि कई जगह स्क्रीन पर प्रश्नपत्र ही दिखाई नहीं दे रहे थे तो कई जगह जगह छात्रों को परीक्षा के लिए अलग-अलग समय निर्धारित किया गया है। बता दें कि इन सबके अलवा देश के कई उच्च न्यायालयों में ऐसी कई याचिकाएं लंबित हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के मामलों की सुनवाई करने पर रोक लगा रखी है।

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