पिता के मौत के बाद जितेंद्र की मां ने घर को संभाला और बेटे को पढ़ाने के लिए लोगों के घरों में बर्तन मांजती थी और मजदूरी करती थी। जितेंद्र ने बताया कि वो शुरू से ही सिविल सर्विसेस में जाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने दिन रात मेहनत की। उन्होंने 22 अगस्त 2016 को पंचकूला में इंटरव्यू दिया था। जितेंद्र ने बताया कि रिजल्ट घोषित होने के बाद जब उनका नाम लिस्ट में आया तो उनको खुशी का ठिकाना नहीं था। जितेंद्र कुमार अपने शहर से पहले एचसीएस अफसर बने हैं।