
जेल के भीतर भगवद गीता और उपनिषद पढ़कर सुहैब इलियासी बने सशक्त
नई दिल्ली। दो दशक पहले छोटे पर्दे पर इंडियाज मोस्ट वांटेड नाम का क्राइम शो प्रसारित करके सुहैब इलियासी मशहूर हो गए थे। लेकिन अपनी बीवी के कत्ल के आरोप में जेल में बने रहने के बाद वो बरी कर दिए गए हैं। जेल से बाहर आने के बाद इलियासी ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि इस दौरान जहां वो रोजाना नमाज पढ़कर अपना मुस्लिम धर्म निभाते थे, शांति और शक्ति के लिए वो भगवद गीता और उपनिषदों का भी पाठ करते थे।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक खुद को देश के इकलौते-पहले क्राइम शो में मशहूर शख्सियत के रूप में देखने के बाद दिल्ली के हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में आरोपी बनने तक, बीते 18 सालों का सफर बहुत कष्टकारी रहा। खुद को 'सच्चा मुस्लिम' बताते हुए 52 वर्षीय इलियासी कहते हैं कि तिहाड़ जेल में सलाखों के पीछे हिंदू धर्मग्रंथों को पढ़ने से इन काले दिनों से बाहर आ सका।
18 साल पहले हो गई थी पत्नी की मौत
सन 2000 में पत्नी अंजू की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहे इलियासी को बीते 5 अक्टूबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने बरी करते हुए इस मामले को आत्महत्या बताया था। 11 जनवरी 2000 को पूर्वी दिल्ली स्थित आवास पर इलियासी की पत्नी अंजू के शरीर पर चाकू से वार किए जाने पर अस्पताल ले जाया गया, जहां पर उसे मृत घोषित कर दिया गया। इसके बाद अंजू की मां और बहन ने इलियासी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।
हालांकि, इलियासी का बीते 18 सालों में से ज्यादातर वक्त जमानत पर बाहर ही बीता है, लेकिन हर वक्त इस खौफ के साये में कि कब उसेे फांसी या आजीवन कारावास की सजा सुना दी जाएगी और वो जिंदगी भर जेल में ही रहेगा। बीते साल 20 दिसंबर को एक ट्रायल कोर्ट ने उन्हें सजा सुना दी, जिसके बाद इलियासी ने हाई कोर्ट में इसे चुनौती दी।
कानून पर पूरा भरोसा
इलियासी कहते हैं, "जब ट्रायल कोर्ट ने मुझे सजा सुनाई, एक पल को तो मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई। लेकिन मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और मेरा मानता था कि अंत में सच की जीत होती है। लेकिन जेल के भीतर आपके पास अनिश्चितता और असुरक्षा वाले इंतजार के अनगिनत पल होते हैं। ऐसे ही पलों में भगवद गीता और उपनिषदों की शिक्षाओं ने मुझे ढाढ़स बंधाया।"
जेल के अपने बुरे दिनों के बारे में याद करते हुए इलियासी बताते हैं कि हिंदू धर्मग्रंथों को पढ़ने और बैरक में बंद उनके साथ वालों ने उनका हौसला बढ़ाया कि इससे उनकी सकारात्मकता खत्म नहीं होगी और नौ माह की जेल के बाद वे ज्यादा मजबूत और समझदार होकर बाहर निकले। उपनिषद का एक श्लोक दोहराते हुए इलियास ने कहा, "इन शिक्षाओं ने मुझे सशक्त, सकारात्मक और प्रोत्साहित बनाए रखा।" इसके बाद वो पूर्णतया शाकाहारी हो गए और इन धार्मिक पुस्तकों की शिक्षा अपने साथी कैदियों को देने लगे।
लिख रहे हैं किताब
वो कहते हैं, "शुरुआत में साथी कैदी यह देखकर चौंक गए कि एक मुसलमान संस्कृत के श्लोक पढ़ रहा है और उनका अर्थ बता रहा है। लेकिन मैं खुश हूं कि इस पवित्र पुस्तक की शिक्षाएं उनसे बांट सका।" पूर्व इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट इलियासी जिनके पिता जमील इलियासी अखिल भारतीय इमाम संगठन के प्रमुख थे, वो गीता और उपनिषदों की शिक्षाओं को आसानी से समझाने के लिए अब किताब लिख रहे हैं। जेल में रहने के दौरान वहां के जर्नल 'शक्ति टाइम्स' का संपादन करने वाले इलियासी कहते हैं, "मैंने इन दो धर्म ग्रंथों की शिक्षाओं से काफी कुछ सीखा और अब मैं इन्हें सामान्य व्यक्तियों के लिए आसान करना चाहता हूं। मैंने इस बारे में जेल में ही काम करना शुरू कर दिया था।"
Updated on:
14 Oct 2018 03:42 pm
Published on:
14 Oct 2018 03:37 pm

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