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सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का सफल युद्ध परीक्षण, मिसाइल टेक्नोलॉजी में भारत की नई छलांग

इस परीक्षण से देश के रक्षा तंत्र को नई मजबूती मिली है। देश में निर्मित इस मिसाइल की गिनती अत्याधुनिक मिसाइलों में की जाती है |

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Brahmos

पोखरण : सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का आज सुबह 8.42 बजे पोखरण टेस्ट रेंज, राजस्थान में सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने बयान जारी कर इस परीक्षण की जानकारी दी । इस मिसाइल का विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने किया है। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस सफल परीक्षण के लिए वैज्ञानिकों को बधाई दी । उन्होंने कहा कि "यह देश की रक्षा के लिए एक मजबूत और स्थिर कदम होगा।" रक्षा मंत्री के अनुसार भारतीय टेक्नोलॉजी से निर्मित से यह मिसाइल देश के रक्षा कवच को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगी ।

क्या है ब्रह्मोस

ब्रह्मोस भारत और रूस की ओर से विकसित की गई अब तक की सबसे आधुनिक प्रक्षेपास्त्र प्रणाली है। इसने भारत को मिसाइल तकनीक में अग्रणी देश बना दिया है। ब्रह्मोस एक कम दूरी की सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल है। इसे पनडुब्बी से, पानी के जहाज से, विमान से या जमीन से भी छोड़ा जा सकता है। यह कम ऊंचाई पर तेजी से उड़ान भरती हैं। अपनी तेज गति के कारण यह राडार से भी बच जाती है। ब्रह्मोस का पहली सफल लॉन्चिंग 12 जून, 2001 को हुई थी। इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र नदी और रूस की मस्कोवा नदी पर रखा गया है । ब्रह्मोस का हाल में बंगाल की खाड़ी में भारतीय वायुसेना के फ्रंटलाइन लड़ाकू विमान सुखोई -30 एमकेआई से भी उड़ान परीक्षण किया गया था। ब्रह्मोस मिसाइल आवाज की गति से करीब तीन गुना अधिक यानी 2.8 मैक की गति से मार करने में सक्षम है।

ये हैं ब्रह्मोस मिसाइल की खूबियां

- यह हवा में ही मार्ग बदल सकती है और चलते-फिरते लक्ष्य को भी भेद सकती है।
- इसको वर्टिकल या सपाट किसी भी प्रक्षेपक से दागा जा सकता है
- यह मिसाइल तकनीक थलसेना, जलसेना और वायुसेना तीनों के काम आ सकती है।
- यह 10 मीटर की ऊंचाई पर उड़ान भर सकती है और राडार की पकड़ में नहीं आती।
- किसी भी अन्य मिसाइल पहचान प्रणाली को धोखा देने में सक्षम है। इसको मार गिराना लगभग असंभव है।
- ब्रह्मोस अमरीका की टॉम हॉक से लगभग दुगनी अधिक तेजी से वार कर सकती है, इसकी प्रहार क्षमता भी टॉम हॉक से अधिक है।
- आम मिसाइलों के उलट यह मिसाइल हवा को खींचकर रेमजेट तकनीक से ऊर्जा प्राप्त करती है।

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