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अवमानना केस: कॉमेडियन कुणाल कामरा और रचिता की बढ़ी मुश्किल, SC ने 6 हफ्तों में मांगा जवाब

अवमानना केस में बढ़ी कॉमेडियन कुणाल कामरा और रचिता तनेजा की मुश्किल सुप्रीम कोर्ट ने मामले में 6 हफ्ते के अंदर मांगा जवाब अर्णब गोस्वामी को SC से जमानत पर किए थे आपत्तिजनक ट्वीट्स

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Dheeraj Sharma

Dec 18, 2020

Kunal Kamra

कॉमेडियन कुणाल कामरा

नई दिल्ली। कॉमेडियन कुणाल कामरा ( Kunal Kamra ) और कार्टूनिस्ट रचिता तनेजा ( Rachita Taneja ) की मुशकिलें बढ़ती नजर आ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court ) ने कुणाल कामरा और रचिता तनेजा को कोर्ट की अवमानना का नोटिस जारी किया है।

यही नहीं सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों से 6 हफ्ते में नोटिस का जवाब भी मांगा है। आपको बता दें कि कुणाल कामरा और रचिता तनेजा ने कथित तौर पर सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया था। इसी मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने दोनों से निर्धारित वक्त में जवाब मांगा है।

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कुणाल और रचिता ने टीवी न्यूज एंकर अर्णब गोस्वामी को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल जाने के बाद आपत्तिजनक ट्वीट्स किए थे। जिन्हें लोग कोर्ट की अवमानना के तौर पर देख रहे थे।

ये है मामला
कॉमेडियन कुणाल कामरा ने 11 नवंबर को अपमानजनक ट्वीट तब किए, जब साल 2018 में आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में अर्नब गोस्वामी ने अग्रिम जमानत याचिका बंबई हाईकोर्ट की ओर से खारिज करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

इससे पहले गुरुवार को कटनेश्वर्कर ने बताया कि ये सभी ट्वीट अपमानजनक हैं और हमने इस मामले में अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से अवमानना कार्यवाही शुरू करने की अनुमति मांगी थी, जो मिल गई है।
इसके साथ ही आपत्तिजनक ट्वीट के कारण रचिता तनेजा के खिलाफ आपराधिक अवमानना कार्यवाही शुरू करने के लिए दायर याचिका पर भी अटॉर्नी जनरल ने अपनी मंजूरी दे दी।

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उपस्थित रहने से मिली छूट
कोर्ट ने दोनों को अपने ट्वीट्स पर छह हफ्ते में जवाब देने का आदेश जारी कर दिया। इन्हें कोर्ट में जवाब दाखिल करना होगा लेकिन इनको खुद उपस्थित होने से छूट मिल गई है। आपको बता दें कि जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस एम आर शाह की पीठ इस केस की सुनवाई कर रही है।

कार्यवाही के लिए लेना होती है सहमति
दरअसल किसी शख्‍स के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करनी है, तो उसके लिए कोर्ट को अवमानना अधिनियम-1971 की धारा-15 के तहत अटॉर्नी जनरल या सॉलिसीटर जनरल की सहमति लेनी होती है। इसके बिना कार्यवाही करना संभव नहीं है।