
नई दिल्ली। देश के लगभग हर गली में ऐसे डॉक्टरों के दवाखाने मिल जाएंगे, जो दवाइयों की हल्की-फुल्की जानकारी रखकर या पुश्तैनी दुकान होने के नाते अपना डेरा जमाए हुए हैं। लेकिन इनमें से एक-आध को छोड़ दें तो बाकी सभी के इलाज से कहीं न कहीं हमारे स्वस्थ्य पर खतरा मंडराता रहता है। लेकिन अब देश की शीर्ष अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने इस तरह इलाज करने वालों पर नकेल कसने की ठान ली है। कोर्ट ने कहा है कि बिना स्वीकृत योग्यता वाले किसी भी व्यक्ति को इलाज करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है।
बिना उपयुक्त योग्यता के इलाज की इजाजत नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इस आधार पर कि यह उस व्यक्ति का पुश्तैनी काम है, उसे देशी तरीकों से इलाज करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट अल्फाजों में कहा कि बिना उपयुक्त योग्यता के किसी भी पारंपरिक या किसी भी तरह के इलाज के तरीके को अपनाने की इजाजत नहीं है।
आजादी के 70 वर्षों बाद भी ऐसी स्थिति चिंताजनक : सुप्रीम कोर्ट
कोर्ट आजादी के 70 वर्षों बाद भी देश में बने झोला छाप डॉक्टरों के गढ़ से चिंतित है। शीर्ष अदालत ने कहा ये सभी झोलाछाप डॉक्टर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खेलते हैं। अकसर इनकी तरफ से की गई लापरवाही का खामियाजा लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती हैं।
पेशा चुनने का अधिकार कानून के दायरे में
हालांकि कोर्ट ने ये माना कि किसी भी देश में किसी को भी अपनी इच्छा से अपना पेशा या व्यवसाय चुनने का मौलिक अधिकार है, लेकिन अगर कोई बिना उपयुक्त योग्यता और शिक्षा के इलाज करने निकल पड़े तो इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा पेशा या व्यवसाय का चुनाव करना किसी तकनीकी या पेशेवर योग्यता से संबंधित कानून के दायरे में होता है। इसी तरह मेडिकल से संबंधित केसों में ये कानून महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये न सिर्फ इलाज करने वाले बल्कि उचित चिकित्सा सुविधा पाने के अधिकार से भी जुड़ा होता है।
इस मामले में चल रही थी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट के एक पीठ ने एक फैसले में कहा कि हमारे देश में जरूरत से कम क्वालिफाइड डॉक्टर हैं। उन्होंने कहा पहले के समय में यह स्थिति स्वीकार्य थी क्योंकि तब देश में शिक्षा के लिए कम संस्थान थे, लेकिन अब वक्त बदल गया है। इसलिए अब हल्की-फुल्की जानकारी रखने वाले लोगों को इलाज करने की अनुमति देना, समाज के लिए घातक होगा। आपको बता दें शीर्ष अदालत ने ये बयान केरल के एक केस के दौरान दिया। जहां ये दलील दी गई थी कि जो लोग पीढ़ियों से लोगों का इलाज करते आ रहे हैं, और उनके आजीविका का यही एक साधन है, इसलिए उन्हें इजाजत दी जाए। लेकिन कोर्ट ने उपरोक्त टिप्पणी देते हुए उनको मेडिकल प्रैक्टिसिंग के लिए इजाजत देने से इनकार कर दिया।
Updated on:
15 Apr 2018 12:10 pm
Published on:
15 Apr 2018 12:04 pm
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