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अश्लील वीडियो हुआ वायरल तो पीड़ित कर सकेंगे ऑनलाइन शिकायत, गुप्त रखी जाएगी पहचान

सुप्रीम कोर्ट ने चाइल्ड पॉर्नोग्राफी को लेकर केंद्र सरकार को लताड़ लगाई है। साथ ही इसे खत्म करने के लिए 11 सुझाव दिए हैं।

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Kapil Tiwari

Oct 27, 2017

Ration sold for mobile

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नई दिल्ली: चाइल्ड पॉर्नोग्राफी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को लताड़ लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि तमाम प्रयासों के बाद भी आखिर सरकार पॉर्नोग्राफी को रोकने में कामयाब नहीं हो पा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने चाइल्ड पॉर्नोग्राफी पर सख्त रूख अपनाते हुए केंद्र सरकार को कुछ आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि चाइल्ड पॉर्नोग्राफी को रोकने के लिए केंद्र सरकार से एक ऑनलाइन पोर्टल और हॉटलाइन नंबर जारी करे, जिसके जरिए कोई भी व्यक्ति अपना नाम बताए अपनी शिकायत वहां कर सके।

गुप्त रखी जाएगी पहचान
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने रेप वीडियोज के प्रसार और बढ़ती चाइल्ड पॉर्नग्राफी को लेकर चिंता जाहिर की है। सुप्रीम कोर्ट ने इसी दिशा में केंद्र सरकार को एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने के लिए कहा है, जिसके जरिए पीड़ित या पीड़िता अपनी पहचान छुपाकर भी शिकायत कर सकें।

केंद्र सरकार को दिए गए 11 सुझाव
गुरुवार को जस्टिस मदन बी लोकुर और यूयू ललित की बेंच ने कोर्ट द्वारा गठित की गई समिति के सुझाव भी स्वीकार किए। इस समिति में गूगल, माइक्रोसॉफ्ट , याहू और फेसबुक के टॉप टेक्नोक्रैट्स के साथ ही केंद्र का भी प्रतिनिधित्व था। कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया है कि समिति के सुझाव को जल्द से जल्द लागू किया जाए। इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड इन्फर्मेशन टेक्नॉलजी मिनिस्ट्री के अतिरिक्त सचिव के नेतृत्व में इस समिति ने सर्वसम्मति से 11 सुझाव दिए ताकि रेप और चाइल्ड पॉर्नोग्रफी के विडियोज को इंटरनेट पर अपलोड और शेयर होने से रोका जा सके।

समिति ने दिया ये सुझाव
समिति ने सुझाव दिया है कि केंद्र को ऑनलाइन सर्च इंजन और सिविल सोसायटी ऑर्गनाइजेशन्स के साथ मिलकर काम करना चाहिए और कीवर्ड्स खोजकर उन्हें ब्लॉक करना चाहिए ताकि लोग आपत्तिजनक विडियोज सर्च ही न कर सकें। यह भी सुझाव दिया गया है कि सभी भारतीय भाषाओं के कीवर्ड्स का पता लगाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को इन सुझावों को लागू करने के संबंध में 11 दिसंबर को स्टेटस रिपोर्ट दायर करने को भी कहा है। बता दें कि केंद्र और इंटरनेट दिग्गजों के चाइल्ड पॉर्नोग्रफी विडियोज को अपलोड होने से रोकने के मामले में हाथ खड़े करने के बाद कोर्ट ने यह समिति बनाई थी।