कोर्ट ने कहा कि विवाहेतर संबंधों को अवैध या अनैतिक माना जा सकता है। लेकिन इसे पत्नी के प्रति क्रूरता मानकर पति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है क्योंकि इसे आपराधिक मामला करार देने के लिए कुछ और परिस्थितियां भी जरूरी होती हैं। जस्टिस दीपक मिश्रा और अमित्व रॉय की बेंच ने कहा कि सिर्फ पति की बेवफाई को आत्महत्या के लिए उकसाने का आधार नहीं माना जा सकता। दरअसल, इस केस में दीपा नाम की महिला ने पति के विवाहेतर संबंधों से परेशान होकर आत्महत्या कर ली थी। दोनों की शादी को सात साल हुए थे। दीपा के बाद उसके भाई और मां ने भी सुसाइड कर लिया था।