Ramsetu को धरोहर घोषित करे सुप्रीम कोर्ट मोदी सरकार पहले ही कर चुकी रुख स्पष्ट हिंदुओं की अस्था से जुड़ा है रामसेतु
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ( BJP ) के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी ( Subrahmaniyam Swami ) की याचिका पर जल्द सुनवार्इ करने से सप्रीम कोर्ट ( Supreme Court ) ने इनकार कर दिया है। बीजेपी नेता ने रामसेतु ( Ramsetu ) को ऐतिहासिक स्मारक के रूप में मान्यता देने की याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इस मुद़दे पर कहा कि इस मामले में तीन महीने बाद विचार किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को एक हलफनामा दाखिल करके अपना रुख भी स्पष्ट करने को कहा है।
तिहाड़ के अधिकारियों ने निर्भया के दोषियों से पूछा, आखिरी इच्छा क्या है?
बता दें कि सुब्रमण्यम स्वामी ने सर्वोच्च अदालत में रामसेतु का मुद्दा उठाया था। उन्होंने साल 2018 में रामसेतु को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की याचिका सुप्रीम कोर्ट में मेंशन की थी। इसमें उन्होंने कहा था कि कोर्ट ने इस पर केन्द्र सरकार को नोटिस जारी किया था। दस साल हो गए लेकिन सरकार ने अभी तक याचिका का जवाब दाखिल नहीं किया।
मोदी सरकार रामसेतु मामले पर अपना रुख पहले ही स्पष्ट कर चुकी है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा दाखिल कर सेतु समुद्रम परियोजना ( Setu samudram project ) और राम सेतु के बारे में कहा था कि समुद्र में जहाजों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए प्रस्तावित सेतु समुद्रम परियोजना के लिए राम सेतु को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। परियोजना के लिए सरकार कोई दूसरा वैकल्पिक मार्ग तलाशेगी।
स्वामी ने अपनी याचिका में कहा है कि राम सेतु लाखों हिन्दुओं की आस्था से जुड़ा है। इसे न तोड़ा जाए और रामसेतु को राष्ट्रीय धरोहर ( National Heritage ) घोषित किया जाए।