
नई दिल्ली। भारत में भ्रष्टाचार से निपटने के लिए कई दावें किये जाते हैं। लेकिन इसका असर कम ही दिखाई दे रहा है। यह हाल ही में हुए सर्वे में भी प्रमाणित हुई है, जिसके आंकड़ो के मुताबिक पिछले साल भारत में करीब 45 प्रतिशत लोगों ने रिश्वत लेने की बात कबूली।
11 राज्यों कराया गया सर्वे
'ट्रांसपैरंसी इंटरनैशनल' द्वारा कराये गए इस सर्वे को 11 राज्यों में कराया गया। पिछले साल कराए गए सर्वे में 43 फीसदी लोगों द्वारा रिश्वत दिए जाने की बात सामने आई थी। आकड़ो के हिसाब से 34,696 लोगों में से 37 फीसदी का मानना है कि एक साल में भ्रष्टाचार बढ़ गया है वहीं 14 फीसदी लोगों का कहना है कि पिछले साल के मुकाबले करप्शन घटा है। पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश में करीब 71 फीसदी लोगों का मानना था कि यहां भ्रष्टाचार बढ़ा है। वहीं महाराष्ट्र में केवल 18 प्रतिशत लोगों ने ही कहा कि उनके राज्य में करप्शन बढ़ा है।
दिल्ली के लोगो की मिलीजुली प्रतिक्रिया
वहीं दिल्ली के आकड़ों की बात करें तो यहां लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया सामने आई। जहां 33% लोगों का कहना था कि भ्रष्टाचार बढ़ा है वहीं 38 फीसदी लोगों के हिसाब से स्थिति जस की तस है।और करीब 28 फीसदी लोगों का कहना है कि भ्रष्टाचार कम हुआ है। यूपी इस मामले में दूसरे नंबर पर जहां 21 फीसदी लोगों ने करप्शन कम होने की बात कही।
निचले स्तर पर सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार के मामले
सर्वे का संचालन कराने वाले 'ट्रांसपैरंसी इंटरनैशनल' के पंकज कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष निचले स्तर पर ही ज्यादातर भ्रष्टाचार के मामले सामने आते हैं। उन्होंने कहा, 'एक राष्ट्रीय सर्वे के मुताबिक 84 फीसदी रिश्वत का लेनदेन नगरपालिका, पुलिस, टैक्स, बिजली, प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन से जुड़े विभागों में होता है।' संस्था के मुताबिक केंद्र सरकार के विभागों को करीब 9% रिश्वत दी गई जैसे, पीएफ, आयकर विभाग, सेवाकर विभाग, रेलवे आदि। सर्वे में 51 फीसदी लोगों का कहना है कि सरकार ने भ्रष्टाचार को घटाने की दिशा में कदम नहीं उठाए हैं। देश में 9 राज्य ऐसे हैं जिनमें लोकायुक्त नहीं हैं।
Published on:
10 Dec 2017 01:25 pm
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