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स्वामी श्रद्धानंद को 97वें बलिदान दिवस पर किया श्रद्धा से याद

- शोभा यात्रा के बाद जनसभा में दी गई श्रद्धांजलि

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स्वामी श्रद्धानंद को 97वें बलिदान दिवस पर किया श्रद्धा से याद

स्वामी श्रद्धानंद को 97वें बलिदान दिवस पर किया श्रद्धा से याद

नई दिल्ली। शिक्षाविद्, स्वतंत्रता सैनानी व आर्य सन्यासी स्वामी श्रद्धानंद को उनके 97वें बलिदान दिवस पर सोमवार को श्रद्धा के साथ याद किया गया। आर्य समाज की ओर से इस अवसर पर पुरानी दिल्ली में शोभा यात्रा निकाली गई। शोभायात्रा रामलीला मैदान पहुंचकर जनसभा में तब्दील हो गई। इसमें आर्य समाज व विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने स्वामी श्रद्धानंद के योगदान को याद करते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

नया बाजार स्थित स्वामी श्रद्धानंद बलिदान भवन से सुबह दस बजे रवाना हुई शोभा यात्रा में दिल्ली-एनसीआर की लगभग 400 आर्य संस्थाओ के लगभग सदस्य और महर्षि दयानन्द सरस्वती के अनुयायी शामिल हुए। चांदनी चौक स्थित टाउन हाल में स्थापित स्वामी श्रद्धानंद की प्रतिमा के समक्ष आर्य वीर दल के युवक-युवतियों ने शौर्य प्रदर्शन किया।

दिल्ली आर्य सभा के प्रधान धर्मपाल आर्य, आर्य केंद्रीय सभा के प्रधान सुरेंद्र रैली, महामंत्री आर्य सतीश चड्डा, स्वामी प्रवणानंद, दयानंद सेवा आश्रम के महामंत्री जोगिन्दर खट्टर, स्वामी सच्चिदानंद के नेतृत्व में निकली शोभा यात्रा विभिन्न मार्गों से दोपहर करीब 12 बजे रामलीला मैदान पहुंची। आर्य समाज के वरिष्ठ नेताओं के अलावा विभिन राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों व आर्य सन्यासियों ने स्वामी श्रद्धानंद को याद किया।

उल्लेखनीय है कि महर्षि दयानंद के अनुयायी स्वामी श्रद्धानंद की 23 दिसम्बर 1926 को पुरानी दिल्ली स्थित पीली कोठी में हत्या कर दी गई थी। उन दिनों स्वामी श्रद्धानंद देशभर में शुद्धि आन्दोलन लोगों की सनातन वैदिक धर्म में वापसी का अभियान चला रहे थे। स्वामी श्रद्धानंद ने अंग्रेजी साम्राज्य के खिलाफ सभी मत-सम्प्रदायों के लोगों को एक करने में मुख्य भूमिका निभाने के साथ अंग्रेजी शिक्षा पद्धति के समकक्ष गुरुकुल कांगड़ी हरिद्वार की स्थापना की।