
देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड स्थित प्रसिद्ध चारधामों में शुमार श्री बद्रीनाथ धाम में सोने का नया छत्र चढ़ाया गया है। 600 साल बाद यहां छत्र बदला गया है। इस प्रसिद्ध तीर्थस्थल में भगवान विष्णु की प्रतिमा पर लगे पुराने स्वर्णछत्र को अब हटा दिया गया है।
ग्वालियर राजघराने ने लगवाया था पुराना छत्र
हिमालय की खूबसूरत वादियों में स्थित इस पवित्र तीर्थस्थल पर करीब 600 साल पहले स्वर्ण छत्र लगवाया गया था। माना जाता है कि यह छत्र ग्वालियर राजघराने की महारानी अहिल्याबाई ने लगवाया था।
...ऐसा है नया छत्र
नया स्वर्ण छत्र लुधियाना के सूद परिवार ने लगवाया है। इसका वजन करीब चार किलोग्राम है। मंदिर के अधिकारी ने बताया कि विशेष पूजा के दौरान इस छत्र को स्थापित किया गया। छत्र स्थापना के दौरान सूद परिवार के सदस्य और मंदिर समिति के अधिकारियों के अलावा वेद पाठ करने वाले वहां मौजूद थे।
अद्भुत है बद्रीनाथ धाम यात्रा का महत्व
सालभर में करीब छह महीने बर्फीली पहाड़ियों से ढंके होने के कारण बंद रहने वाले इस धाम का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। यहां नर-नारायण विग्रह की पूजा की जाती है और अखंड दीप जलता रहता है। यहां शालग्रामशिला से बनी हुई मूर्ति है जो चतुर्भुज ध्यानमुद्रा में है। यहां गंगा नदी को अलकनंदा धारा के नाम से जाना जाता है। इसी से सरस्वती का संगम भी होता है। यहीं से करीब तीन किमी की दूरी पर भारत का आखिरी गांव भी है, जो माना के नाम से प्रसिद्ध है।
स्थानीय रोजगार में भी विशेष महत्व
उत्तराखंड पहाड़ी राज्य होने के चलते यहां औद्योगिक विकास पर्याप्त रूप से नहीं हुआ है। पर्यटन यहां रोजगार और राजस्व का सबसे बड़ा स्रोत है। चारधाम यात्रा शुरू होते ही यहां स्थानीय लोगों के चेहरे खिल जाते हैं। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही से उनकी अच्छी खासी कमाई हो जाती है।
Published on:
11 May 2018 03:10 pm
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