Tamilnadu : एमजीआर यूनिवर्सिटी का दावा - 15 जुलाई तक Chennai छू लेगा 1.5 लाख  Corona केस का आंकड़ा

  • चेन्नई में कोरोना संक्रमण का पीक पर आना अभी बाकी है।
  • एमजीआर के अनुमान को गंभीरता से लेने की जरूरत है।
  • प्रो. श्रीनिवास का अनुमान सरकार के लिए रणनीतिक तौर पर मददगार।

नई दिल्ली। तमिलनाडु स्थित डॉ. एमजीआर मेडिकल यूनिवर्सिटी ( Dr. MGR Medical University ) के महामारी विज्ञानियों ( Epidemiologists ) ने चेन्नई में कोरोना वायरस ( coronavirus ) के संभावित खतरे को लेकर बड़ा दावा किया है। महामारी विज्ञानियों का दावा सच हुआ तो यह चेन्नई सहित पूरे देशवासियों के लिए चिंता का सबब हो सकता है।

डॉ. एमजीआर मेडिकल यूनिवर्सिटी के महामारी विज्ञानियों ने दावा किया है कि चेन्नई में 15 जुलाई तक कोरोना मरीजों की संख्या बढ़कर 1.5 लाख तक पहुंच सकती है। कोरोना से मरने वालों की संख्या भी 1600 के आंकड़ें को छू सकता है।

महामारी विज्ञानियों के इस दावे से साफ है कि चेन्नई में कोरोना संक्रमण का पीक पर आना अभी बाकी है। बता दें कि एमजीआर विश्वविद्यालय के आंकड़ों को प्रदेश सरकार ( State Government ) कोरोना के खतरे से पार पाने के लिए उपयोग में लाती है।

एमजीआर मेडिकल यूनिवर्सिटी के महामारी विज्ञानियों प्रोफेसर डॉ. जी श्रीनिवास ( Epidemiologists Prof G Shriniwas ) का कहना है कि कोरोना को लेकर अनुमान लगाने का काम 18 अप्रैल को शुरू किया गया था। सर्वे रिपोर्ट मई के पहले सप्ताह में सरकार को सौंप दिया गया।

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कोरोना के मद्देनजर प्रदेश सरकार ने पर्याप्त संख्या में आइसोलेशन, आईसीयू और बुनियादी ढांचे की व्यवस्था की है। अगर कोरोना की स्थिति बिगड़ी तो सरकार स्थिति को संभालने की स्थिात में होंगी। श्रीनिवास की टीम का कहना है कि 30 जून तक 1.3 लाख कोरोना मरीज और इससे मरने वालों की संख्या 769 तक पहुंच सकती है।

सर्वे के 19 दिनों में कोविद-19 के मामले 10 हजार से बढ़कर 27, 256 हो गए। शहर में 7,066 मामले सामने आए। गुरुवार को 1072 मामले दर्ज किए गए। 7 मार्च के बाद तमिलनाडु में दर्ज कुल मामलों से 18,693 चेन्नई के मरीज शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि गणितीय अनुमान ( Mathematical Projection ) बीमारी के प्रसार को रोकने में मददगार साबित हो सकते हैं। सरकार सर्वे के पूर्वानुमानों के आधार पर रणनीतिक निर्णय ले सकती है। ये अनुमान लंबे समय के लिए भी लगाया जा सकता हैं।

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नेशनल इंस्टीटृयूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी के पूर्व निदेशक व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आर रामकृष्णन ( Former director and senior scientist of National Institute of Epidemiology Dr. R. Ramakrishnan ) ने कहा कि न तो वैज्ञानिक देवता हैं और न ही यह अनुमान कार्य है। सिर्फ इसलिए उनके अनुमान पिछले दो महीनों से सही थे हम नहीं कह सकते कि उनका अनुमान आगे भी सही हो सकता है। उनके अनुमान ऐसे संकेतक है जिसे गंभीरता से लेने की जरूरत है। रामकृष्णन का कहना है कि अब बस और ट्रेन सेवाओं को फिर से शुरू कर दिया गया है। ऐसे में स्थितियां बदल सकती हैं।

उन्होंने बाताया कि एमजीआर विश्वविद्यालय के पिछले अनुमान सटीक थे। उनके गणितीय मॉडल ने 25 मई को 83 मौत का अनुमान लगाया था जो सच हुआ। एक ही दिन के मामलों का कोरोना केसों की संख्या का पूर्वानुमान 11,119 का लगाया गया था जिसमें केवल 12 ही कम रहें। 3 जून के पूर्वानुमान में कहा गया था कि 17,738 मामले और 156 मौतें होंगी। वास्तविक आंकडे 17,598 और मौतें 153 हुईं थीं।

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