
वैसे तो आपने अकबर और बीरबल के तमाम किस्से सुने ही होंगे। लेकिन हम आपको बीरबल की मौत से जुड़े रहस्य के बारे में बताएंगे। ऐसा माना जाता है कि यदि बीरबल न होता तो अकबर की ज़िंदगी भी लगभग खत्म सी ही हो जाती। जैसा कि आप जानते हैं कि अकबर के शादी दरबार में कुल 9 रत्न थे। लेकिन इन सभी रत्नों में बीरबल का दर्जा सबसे ऊंचा था। न सिर्फ अकबर बल्कि उनके दुश्मन भी बीरबल के दिमाग और चतुराई से हैरान थे।

अकबर जब किसी घोर मुसीबत में होते थे तो बीरबल ही एकमात्र ऐसे शख्स थे जो उनकी सभी दिक्कतों का निवारण करते थे। सन् 1528 में बीरबल का जन्म उत्तरप्रदेश के कालपी के पास ही यमुना किनारे के एक गांव में हुआ था। बीरबल ने एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। बीरबल को हिंदी के अलावा संस्कृत और फ़ारसी भाषा का भी ज्ञान था।

स्वात घाटी में बीरबल अपनी टुकड़ी के साथ फंस गए थे। इस दौरान दुश्मनों ने उनपर हमला कर दिया। हमले के बाद अकबर को बीरबल की लाश भी नहीं मिल पाई थी। बताया जाता है कि बीरबल की मृत्यू की खबर सुनने के बाद अकबर दो दिन तक बिना खाए-पिए रहे। जिसके बाद अपने हज़ारों सैनिकों की लाश का एक साथ अंतिम संस्कार कराया गया और उनकी अस्थियों को गंगा में प्रवाहित कराया गया था।