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यहां लोग कब्रों के बीच बैठकर पीते हैं चाय, एम.एफ.हुसैन भी थे इस जगह के मुरीद

यहां जाने के बाद आप एक दफा तो जरूर ये सोचने को मजबूर हो जाएंगे कि कब्रिस्तान है या टी स्टॉल।

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Arijita Sen

Mar 12, 2018

'The new Lucky Restaurant'

नई दिल्ली। चाय, एक ऐसा शब्द जिसे सुनते ही ताजगी का एहसास होने लगता है। ऑफिस हो या दुकान, घर हो या मुहल्ले का नुक्कड़ या फिर गंगा का घाट हो या समंदर का किनारा चाय का प्याला लेकर बैठे हुए लोग आपको हर कही नज़र आ ही जाएंगे क्योंकि चाय के दीवानों की संख्या हजारों में नहीं बल्कि करोड़ो में है या फिर शायद उससे भी ज्यादा इसलिए कोई इसके लिए जगह नहीं देखता बस मिला चाएं और लगा लिए चुस्की लेकिन क्या कभी कोई किसी कब्र के बीच में बैठकर चाय पी सकता है। हां इसका जवाब आप ये दे ही सकते है कि वहां के रखरखाव करने वाले ऐसा कर ही सकते हैं लेकिन हम यहां बात आम जनता के बारे में कर रहे हैं तो ऐसा भला कौन चाहेगा कि वो जानबूझकर कब्र के बीच में बैठकर चाय की चुस्की लें।

ये बात हमारे और आपके लिए भले ही असामान्य हो लेकिन अहमदाबाद के लोगों के लिए ये बिल्कुल नॉर्मल है क्योंकि यहां के 'द न्यू लकी रेस्टोरेंट ' का नजारा कुछ ऐसा ही है। यहां जाने के बाद आप एक दफा तो जरूर ये सोचने को मजबूर हो जाएंगे कि कब्रिस्तान है या टी स्टॉल।

'द न्यू लकी रेस्टोरेंट' यहां काफी फेमस है और यहां बुजुर्ग से लेकर नौजवान सभी चाय का आनंद लेने आते हैं। यहां आने वाले पुराने ग्राहकों का ये कहना है कि ये पहले एक छोटी सी चाय की दुकान थी लेकिन वक्त कि साथ इसका भी रूप बदला और आज ये काफी मशहूर है, इतना कि लोग यहां दूर-दूर से आते हैं और तो और मशहूर पेंटर एमएफ हुसैन भी 'द न्यू लकी रेस्टोरेंट' में चाय का आनंद लेने आते थे।

वो इस रेस्टॉरेंट के इतने मुरीद थे कि वो इस जगह पर बैठकर कई पेंटिग्ंस भी बनाई है और इनमें से कई पेंटिग्ंस उन्होनें इस रेस्टोरेंट को भी भेंट स्वरूप दिया है। केवल देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग यहां आते हैं और अनोखे सीटिंग अरेंजमेंट के बीच चाय का आनंद लेते है। बता दें इस रेस्टोरेंट में कुल 26 कब्रें है और इन कब्रों का रखरखाव यहां के स्टाफ खुद करते हैं।