
नई दिल्ली। हमारे देश में प्राकृतिक संपदाओं और इंसानी कलाकृति की कोई कमी नहीं है। हमें हर रोज़ अपने देश की अद्भूत कलाकृतियों के बारे में पता चलता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं 981 ईसवी में गंग साम्राज्य के राजा राजमल के सेनापति चामुंडराय ने मां की इच्छा पर श्रवणबेलगोला में बाहुबली की एक प्रतिमा निर्माण करवाया था। हैरान करने वाली बात तो ये है कि एक ही पत्थर से बनी ये दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी मूर्ति है जो कि 58.8 फीट ऊंची है और 30 किमी दूरी से ही दिखाई देती है।
इससे पहले चीन में लेशेन में बुद्ध की 233 फीट ऊंची है जिसको 8वीं सदी में बनाया गया था। इसके बाद आता है मिस्र के करीब 2000 साल पुराने पिरामिड की जिसकी ऊंचाई 65 फीट है। इस बाहुबली की प्रतिमा के पास प्लेटफॉर्म बनाने के लिए पहली बार जर्मन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया हैं और इसमें स्टेज पर एक बार में करीबन 6 हजार लोग पूजा कर सकेंगे। इस प्लेटफॉर्म को बनाने के लिए करीब 450 टन सामान जर्मनी से गुजरात पोर्ट पर मंगाया गया और वहीं से श्रवणबेलगोला लाया गया और इस पूरी प्रक्रिया में कुल 12 करोड़ का खर्च आया।
आपको बता दें कि इस प्लेटफॉर्म तक पहुंचने के लिए 3 एलिवेटर्स बनाए गऐ हैं इनमें से दो श्रद्धालुओं के लिए है और एक का उपयोग महाभिषेक की सामग्री को पहुंचाने के लिए किया जाएगा। अब इस बाहुबली के मूर्ति का 86 वां आयोजन किया जाएगा जो कि हर बारह साल में एक बार होता है। इससे पहले इसका अभिषेक साल 2006 में किया गया था।
इस साल इस महोत्सव का पालन 7 फरवरी से 26 फरवरी के बीच किया जाएगा। कर्नाटक के श्रवणबेलगोला में स्थित विंध्यगिरि पहाड़ी पर भगवान बाहुबली के 86वें महामस्तकाभिषेक की सभी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। इस पूरे महोत्सव के दौरान करीब 500 करोड़ रूपए खर्च होने के कयास लगाए जा रहे हैं। इस बार इस महोत्सव में कुल ३० लाख लोग आएंगे। ये मूर्ति 1037 साल पूरानी है।

Published on:
15 Jan 2018 11:01 am
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