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चुटकियों में घुटने टेक देगा दुश्मन, इन 10 कमांडो फोर्सेस से कांपते हैं चीन और पाक

आज हम आपको बताने जा रहे हैं भारत की 10 सबसे घातक, शानदार और इंटेलिजेंट कमांडो फोर्सेस के बारे में। इन बलों के आगे दुश्मन चुटकियों में घुटने टेक देते हैं। ये सभी बल भारत की आन बान और शान हैं...

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siddharth tripathi

Sep 26, 2016

indian commando

indian commando

नई दिल्ली। आज हम आपको बताने जा रहे हैं भारत की 10 सबसे घातक, शानदार और इंटेलिजेंट कमांडो फोर्सेस के बारे में। इन बलों के आगे दुश्मन चुटकियों में घुटने टेक देते हैं। ये सभी बल भारत की आन बान और शान हैं।

nsg commando






















एनएसजी
एनएसजी देश के सबसे अहम कमांडो फोर्स में एक है जो गृह मंत्रालय के अंदर काम करते हैं। एनएसजी में चुने जाने वाले जवान तीनों सेनाओं, पुलिस और पैरामिलिट्री के सबसे अच्छे जवान होते हैं। आतंकवादियों की ओर से आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर लडऩे के लिए इन्हें विशेष तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। 26/11 मुंबई हमलों के दौरान एनएसजी की भूमिका को सभी ने सराहा था। इसके साथ ही वीआईपी सुरक्षा, बम निरोधक और एंटी हाइजैकिंग के लिए इन्हें खासतौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इनमें आर्मी के लड़ाके शामिल किए जाते हैं, हालांकि दूसरे फोर्सेस से भी लोग शामिल किए जाते हैं। इनकी फुर्ती और तेजी की वजह से इन्हें ब्लैक कैट भी कहा जाता है।

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मार्कोस
मार्कोस का नाम आपने कम ही सुना होगा। इंडियन नेवी के स्पेशल कमांडोज जिन्हें आम नजरों से बचा कर रखा गया है। मार्कोस को जल, थल और हवा में लडऩे के लिए विशेष ट्रेनिंग दी जाती है। समुद्री मिशन को अंजाम देने के लिए इन्हें महारत है। 20 साल उम्र वाले प्रति 10 हजार युवा सैनिकों में एक का सिलेक्शन मार्कोस फोर्स के लिए होता है। इसके बाद इन्हें अमेरिकी और ब्रिटिश सील्स के साथ ढाई साल की कड़ी ट्रेनिंग करनी होती है। स्पेशल ऑपरेशन के लिए इंडियन नेवी के इन कमांडोज को बुलाया जाता है। मार्कोस हाथ पैर बंधे होने पर भी तैरने में माहिर होते हैं। ये कमांडो हमेशा सार्वजनिक होने से बचते हैं। नौसेना के सीनियर अफसरों की मानें तो परिवार वालों को भी उनके कमांडो होने का पता नहीं होता है। 26/11 हमले में आतंकवादियों से निपटने में इनकी खास भूमिका थी।

elite para commando






















एलीट पैरा कमांडो
एलीट पैरा कमांडो हवा में मार करने के लिए ट्रेंड होते हैं। इन जवानों को 30 से 35 हजार फीट की ऊंचाई से छलांग लगाने में महारत हासिल होती है। इंडियन आर्मी के एलीट पैराकमांडोज ने इंडो-म्यांमार बार्डर पर सर्जिकल मिशन को अंजाम दिया। इस यूनिट में स्पेशल ट्रेन्ड कमांडोज होते हैं। यह कमांडोज पैराशूट रेजिमेंट का हिस्सा हैं। इसमें स्पेशल फोर्सेस की 7 बटालियंस शामिल हैं। इस कमांडो यूनिट का निर्माण भारत और पाकिस्तान के बीच 1965 में हुई जंग के दौरान हुआ था। इंडियन आर्मी के ट्रेंड कमांडो दुश्मनों को छलने के लिए विशेष ड्रेस का इस्तेमाल करते हैं। इन ड्रेसों का हल्का रंग रेगिस्तान में और गाढ़ा रंग हरियाली के बीच उन्हें छिपने में मदद करता है। कमांडो एक खास झिल्लीदार सूट भी पहनते हैं, जिन्हें किसी वातावरण में छिपने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। स्पेशल फोर्स पर्पल बैरेट पहनते हैं और इनकी इजराइली टेओर असॉल्ट राइफल इन्हें पैरामिलिट्री फोर्स से अलग बनाती है।

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एसपीजी
एसपीजी को प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए खास तौर पर तैयार किया गया है। हालांकि वह अपनी ट्रेडमार्क सफारी सूट में हमेशा दिखते हैं, लेकिन कुछ खास मौकों पर एसपीजी कमांडोज को बंदूकों के साथ काली ड्रेस में भी देखा जाता है। एसपीजी के जवान बहुत ही ज्यादा चुस्त और समझदार होते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1985 में इसे बनाया गया, अब यह कमांडो फोर्स पूर्व प्रधानमंत्री और उनके परिवारों को सुरक्षा प्रदान करते हैं।

swat commando






















स्वात कमांडोज
अमेरिका के तर्ज पर बनी है भारत की स्वात कमांडोज की टीम, किसी भी हालत से निपटने में माहिर है। दिल्ली पुलिस के स्वात कमांडो मतलब सुरक्षा की गारंटी दिलाते है। स्वात कमांडो की ट्रेनिंग बेहद कठिन होती है। ये कमांडो फोर्स किसी भी हालात में दुश्मन का खात्मा करने के लिए ट्रेंड होते हैं। इसमें इन्हें हवा में, पानी में और जंगल में घात लगाकर मार करने की तकनीक सिखाई जाती है। आधुनिक हथियारों से लैस ये कमांडो रात के अंधेरे में भी दुश्मन को पहचान उनका खात्मा करने के लिए ट्रेंड होते हैं। आतंकियों और नक्सलियों से निपटने के लिए तैयार किया जाता है। बता दें कि 2008 में मुंबई हमले के बाद दिल्ली पुलिस के स्वात कमांडोज का गठन किया गया।

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गरुण कमांडोज
इंडियन एयरफोर्स ने 2004 में अपने एयर बेस की सुरक्षा के लिए इस फोर्स की स्थापना की। मगर गरुण को युद्ध के दौरान दुश्मन की सीमा के पीछे काम करने के लिए ट्रेंड किया गया है। आर्मी फोर्सेस से अलग ये कमांडो काली टोपी पहनते हैं। गरुड़ जवान पानी, हवा और रात में मार करने की अनोखी क्षमता रखते हैं और इन्हें मुख्य तौर पर माओवादियों के खिलाफ मुहिम में शामिल किया जाता रहा है।

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कोबरा कमांडो
कोबरा यानी की कमांडो बटालियन फॉर रिजॉल्यूट एक्शन। कोबरा के जवानों को गुरिल्ला ट्रेनिंग द्वारा तैयार किया जाता है। कोबरा के जवानों को वेश बदलने से लेकर घात लगाकर हमला करने में कोई मात नहीं दे सकता। संसद भवन और राष्ट्रति भवन की सुरक्षा का जिम्मा कोबरा के पास ही है। कोबरा का गठन 2008 में किया गया था।

फोर्स वन कमांडो
फोर्स वन कमांडो अपनी तेज प्रतिक्रिया के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। जिसे महाराष्ट्र सरकार ने 2010 मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद बनाया गया है। इनका मुख्य काम मुंबई मेट्रोपॉलिटेन को सुरक्षित रखना है। यह स्पेशल फोर्स दुनिया के सबसे तेज और चपल स्पेशल फोर्सेस में से एक हैं, जिन्हें किसी भी आपदा से लडऩे के लिए सिर्फ 15 मिनट की जरूरत होती है।

force 1 commando






















आईटीबीपी कमांडोज
आईटीबीपी के स्पेशल कमांडोज ने मुंबई के 26/11 आतंकी हमले के बाद मुख्य अभियुक्त अजमल कसाब को मुंबई जेल में रखने में अहम भूमिका निभाई थी। दिल्ली की तिहाड़ जेल की निगरानी की कमान भी इन्हीं के हाथों में है। इसके साथ ही ये भारत-चीन सीमा की भी विशेष निगरानी करते हैं।

itbp commando






















सीआईएसएफ कमांडोज
सीआईएसएफ के कमांडोज को आमतौर पर वीवीआईपी, एयरपोर्ट और इंडस्ट्रियल इलाकों के लिए खास तौर पर तैनात किया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय एयरपोट्र्स जैसे दिल्ली और मुंबई इन्हीं की निगरानी में सुरक्षित रहते हैं। मुंबई के 26/11 हमले के बाद इनका इस्तेमाल प्राइवेट सेक्टर की सिक्युरिटी के लिए भी होने लगा है। इसका अपना स्पेशल फायर विंग भी है, साथ ही यह फोर्स दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा भी करती है।

cisf commando

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