गत सितम्बर में हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संयुक्त
राष्ट्र में अपना संबोधन हिन्दी में किया। इसके बाद दिसम्बर में संयुक्त राष्ट्र ने
21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का ऎतिहासिक निर्णय लिया। इससे
पता चलता है कि विश्व संस्था में हिन्दी का महत्व बढ़ रहा है और वहां इसे जल्दी ही
मान्यता दी जायेगी। राष्ट्रपति ने हिन्दी भाषा को भारत के पारंपरिक ज्ञान, प्राचीन
सभ्यता और आधुनिक प्रगति में महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए जोर देकर कहा कि विज्ञान और
प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी इसके इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने
कहा कि इससे ग्रामीण आबादी भी देश की प्रगति में भागीदार बन सकेगी। इसके लिए तकनीकी
ज्ञान की पुस्तकों का सरल भाषा में अनुवाद होना चाहिए और यह अन्य भाषाओं में भी
उपलब्ध होनी चाहिए।