Unlock 6.0: दिल्ली में क्यों बंद रहेंगे स्कूल, शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने दिया जवाब

  • दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दी स्कूल बंद ( Delhi Schools closed ) रहने की जानकारी।
  • साथ ही कारण बताया कि क्यों लेना पड़ा राजधानी के स्कूल बंद रखने का फैसला।
  • इसके साथ ही इस वर्ष स्नातक और परास्नातक पाठ्यक्रमों में बढ़ाई गई हैं सीटें।

नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा मंगलवार को आगामी 30 नवंबर तक के लिए अनलॉक के पिछले दिशानिर्देशों को बढ़ा दिया गया है। यानी अनलॉक 6.0 के दौरान अनलॉक 5.0 की गाइडलाइंस ही लागू रहेंगी। हालांकि इस बीच दिल्ली में कोरोना वायरस के हालात को देखते हुए डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने बुधवार को घोषणा की कि राष्ट्रीय राजधानी में स्कूल बंद ( Delhi Schools closed ) रहेंगे। लेकिन राजधानी में स्कूलों को बंद रखने के पीछे क्या कारण है, आइए जानते हैं।

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दरअसल, उप-मुख्यमंत्री की घोषणा के पीछे प्रमुख कारण अभिभावकों का तैयार ना होना है। दिल्ली के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक नहीं चाहते हैं कि कोरोना वायरस महामारी के दौरान उनके बच्चे स्कूल जाएं और खतरे में पड़ें।

बुधवार को एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिसोदिया ने कहा कि माता-पिता स्कूलों को फिर से खोलने के पक्ष में नहीं हैं। इससे पहले दिल्ली सरकार ने घोषणा की थी कि राजधानी के स्कूल 31 अक्टूबर तक बंद रहेंगे। उन्होंने ट्वीट किया, "दिल्ली में कोरोना की वजह से सभी स्कूल अगले आदेश तक बंद रहेंगे। वर्तमान में जारी ऑनलाइन, सेमी-ऑनलाइन पढ़ाई जारी रहेगी।"

सिसोदिया ने कहा, "महामारी को ध्यान में रखते हुए तमाम अभिभावकों और शिक्षकों ने सलाह दी थी कि अगर 200-400 स्टूडेंट्स भी आना शुरू हो जाएं, तो भी स्कूलों को किसी भी वक्त नहीं खोलना चाहिए, बच्चों में कोविड-19 संक्रमण फैलने का डर है। रिपोर्टों के मुताबिक जिन भी देशों में स्कूल खोले गए, वहां पर मामलों की संख्या बढ़ी देखी गई। इस बारे में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मैंने विचार किया कि क्या बतौर अभिभावक हम अपने बच्चों को इस जोखिम में डालने के लिए तैयार हैं।"

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वहीं, इससे पहले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राज्य में स्कूलों को फिर से खोलने को लेकर इनकार कर दिया था। दिल्ली के स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 2,500 बच्चों के अभिभावकों ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कार्यालय में सभी अभिभावकों प्रतिनिधित्व करते हुए अनुरोध किया था कि मौजूदा महामारी के कारण स्कूलों को इस शैक्षणिक वर्ष में नहीं खोला जाए।

सीएमओ को लिखे एक ईमेल में दिल्ली पैरेंट्स एसोसिएशन ने 2,498 माता-पिता से मिले छोटे इनपुट और विचार भेजे, जिनमें से लगभग सभी ने कहा कि वे अपने बच्चों को वर्तमान में स्कूलों में भेजने में सहज नहीं हैं।

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केंद्र सरकार के "अनलॉक" दिशानिर्देशों के अनुसार राज्य चरणबद्ध ढंग से स्कूलों को फिर से खोलने के बारे में फैसला कर सकते हैं। गृह मंत्रालय द्वारा पहले कक्षा 9 से 12 तक स्कूलों को खोलने की अनुमति दी गई थी। बता दें कि COVID-19 के प्रसार को रोकने के लिए केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद से बीते 16 मार्च से स्कूल बंद रहे थे।

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इसके अलावा सिसोदिया ने बुधवार को यह भी कहा कि इस वर्ष स्कूलों से पढ़ाई पूरी कर निकलने वाले छात्रों के पास राजधानी में ज्यादा अवसर होंगे, क्योंकि प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में 1,330 सीटें बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी से संबंद्ध 130 से ज्यादा कॉलेजों में बीए, बीटेक, बीबीए समेत तमाम पाठ्यक्रमों में नई सीटें बढ़ाई गई हैं।

यों तो ज्यादातर सीटों की बढ़ोतरी स्नातक पाठ्यक्रमों में की गई है, एमबीए, एमवोक (वोकेशन) और एमएससी जैसे परास्नातक पाठ्यक्रमों में भी कुछ सीटें बढ़ाई गई हैं।

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अमित कुमार बाजपेयी
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