
बंगाली सिनेमा के महानायक उत्तम कुमार
नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में बांग्लाभाषी कलाकारों ने काफी अहम योगदान रहा। अशोक कुमार, किशोर कुमार, उत्पल दत्त से लेकर मिथुन चक्रवर्ती तक कई ऐसे कलाकार आए जिन्होंने लोगों के दिलों में जगह बनाई। इन्हीं में से एक थे उत्तम कुमार ( Uttam Kumar ) । इन्हें बंगाली सिनेमा का महानायक भी कहा जाता है। बंगाली भाषा में इनकी फिल्मों ने कई रिकॉर्ड बनाए। फिल्म 'अमानुष' के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला था। 3 सितंबर को इनकी 94वीं बर्थ एनिवर्सरी है।
उत्तम कुमार केवल अपनी अदाकारी की वजह से ही लोगों के दिलों पर राज नहीं करते थे। संघर्ष करने वाले कलाकारों की मदद के लिए हमेशा उत्तम कुमार आगे रहते थे। आईए जानते हैं उनकी जन्मदिन पर उनसे और उनके करियर से जुड़ी कुछ खास बातें।
पहले अरुण कुमार था नाम
उत्तम कुमार का जन्म 3 सितंबर, 1926 को कोलकाता में हुआ। उनके बचपन का नाम अरुण कुमार चट्टोपाध्याय था। प्रारंभिक शिक्षा ‘साउथ सबअर्बन स्कूल’ में हुई। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय में दाखिला लिया।
उत्तम की शिक्षा के समय में हालांकि परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। ऐसे में उन्होंने पढ़ाई छोड़ नौकरी का फैसला लिया। जल्द ही उन्हें कलकत्ता पोर्ट ट्रस्ट में क्लर्क की नौकरी मिल गई।
नौकरी के साथ थिएटर
उत्तम ने नौकरी के साथ-साथ अपने अभिनय के शौक को भी पूरा किया और विभिन्न थिएटर समूहों में काम करना शुरू कर दिया।
1948 में आई पहली फिल्म
बतौर एक्टर उनकी पहली फिल्म 1948 में आई थी। फिल्म का नाम था ‘दृष्टिदान’। यह फिल्म फ्लॉप रही। इसके बाद लगातार उनकी 5 फिल्में फ्लॉप रहीं।
फ्लॉप फिल्मों की वजह से निराश उत्तम इसमें अपना करियर छोड़ना चाहते थे, लेकिन पत्नी गौरी के कहने पर उन्होंने इसे जारी रखा और 1954 में उनकी ‘बासू पोरिबार’ और ‘सरे चुत्तौर’ नाम की दो फिल्में रिलीज हुईं । इन्होंने बॉक्स ऑफिस पर तो धमाल मचाया साथ उत्तम के अभिनय की जमकर तारीफ हुई।
सुचित्रा सेन के साथ 32 फिल्में
इसके साथ ही सिनेमा में उत्तम कुमार की रोमांटिक हीरो की इमेज बन गई थी। उन्होंने सुचित्रा सेन के साथ 32 बांगला फिल्मों में काम किया।
‘अग्निपोरिक्षा’ से बने सुपर स्टार
फिल्म अग्नपोरिक्षा ने उत्तम को रातों-रात स्टार बना दिया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
गुरुदत्त को कहा ना
एक नाटक में उत्तम कुमार के अभिनय से प्रभावित होकर गुरुदत्त ने उन्हें अपनी फिल्म साहब बीवी और गुलाम के लिए ऑफर दिया, लेकिन साथ ही पांच साल के कॉन्ट्रेक की बात भी कही। कॉन्ट्रेक्ट की वजह से उत्तम कुमार ने उन्हें ना कह दी और फिल्म छोड़ दी।
इन हिंदी फिल्मों में किया काम
उत्तम की पहली हिंदी फिल्म थी ‘छोटी की मुलाकात’। इसके बाद उन्होंने ‘अमानुष’सुपर हिंट रही। फिर ‘आनंद आश्रम’, ‘दूरियां’, ‘बंदी’, ‘किताब’, ‘दो दिल’, ‘नायक’, ‘राजकुमारी’, ‘मेरा करम मेरा धरम’, ‘देश प्रेमी’ सहित अन्य फिल्मों में काम किया।
राजकपूर ने की थी तारीफ
राजकपूर ने उत्तम कुमार के अभिनय और उनकी पर्सनालिटी को लेकर उन्हें स्मार्ट 'मॉडर्न हीरो ऑफ इंडिया' कहा था।
शूटिंग के दौरान हुआ निधन
1980 में ‘ओ गो बोधु शुंदरी’ की शूटिंग के दौरान 53 वर्ष की उम्र में दिल का दौरा पड़ने उत्तम कुमार का निधन हो गया। बंगाल सिनेमा का महानायक उन्हें छोड़कर चला गया। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कोलकाता में हाजरा अंचल में उनके नाम पर उत्तम थियेटर है और टालीगंज ट्रामडिपो के सामने उनका विशाल स्टैच्यू चौक पर लगाया गया है।
Published on:
03 Sept 2020 04:04 pm
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