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भारत निवेशकों के लिए सबसे अच्छी जगह, लंबे समय तक विकास के लिए इनोवेशन जरूरी- उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की विकास यात्रा से दुनिया हैरान है और यह निवेशकों के लिए आकर्षक ठिकाना बन गया है।

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भारत को विकास की रफ्तार बनाए रखने के लिए इनोवेशन की जरूरत : उपराष्ट्रपति

वारंगल: उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था 2025 तक 50 खरब डॉलर की बनने वाली है, इसलिए विकास की रफ्तार को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए नवाचारी कार्य को जारी रखना होगा। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की विकास यात्रा से दुनिया हैरान है और यह निवेशकों के लिए आकर्षक ठिकाना बन गया है। नायडू ने कहा, "भारत का विकास टिकाऊ हो, इसके लिए हमें नवोन्मेषी कार्य को जारी रखना होगा। भारत अब अप्रचलित बनाने की कोशिश नहीं कर सकता है।" उपराष्ट्रपति ने यहां राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) के हीरक जयंती समारोह का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि भारत को कम खर्च में नवाचार करने के लिए जाना जाता है।

टेक्नोलॉजी से मानव जीवन बेहतर बनया जा सकता

उपराष्ट्रपति नायडू ने कहा कि नवाचार से भ्रष्टाचार और अनुदान की चोरी रोकने में मदद मिली है। इससे अत्यंत कठिन समस्याओं को भी सक्षम व प्रभावकारी ढंग से सुलझाने में मदद मिली है। उन्होंने कहा, "हमें अपनी कार्यपद्धतियों को सरल व पारदर्शी बनाने पर ध्यान देना चाहिए।" नायडू ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी से आखिरकार मानव जीवन को बेहतर बनाया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एनआईटी जैसे प्रौद्योगिकी संस्थानों को व्यापक स्तर के नवाचार पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि नवाचार का एक ही मंत्र हो कि उससे संस्थान आगे बढ़े। नायडू ने कहा कि भारत के लिए नवाचार की सख्त जरूरत है।

अंग्रेजी उपनिवेशवादी से निकलना जरूरी

गौरतलब है कि पिछले दिनों उपराष्ट्रपति राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) द्वारा आयोजित दीक्षांत समारोह में नायडू ने कहा कि वह अंग्रेजी भाषा के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन भारत को अंग्रेजी उपनिवेशवादी शासन की मानसिकता से बाहर निकलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि नमस्कार भारत में हमारा संस्कार है। यह सुबह, शाम और रात में भी उचित है। उपराष्ट्रपति ने याद करते हुए कहा कि कैसे हाल ही में अंग्रेजी को एक बीमारी कहने के बाद मीडिया के एक वर्ग ने उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया था, जबकि वह मातृभाषा की रक्षा और प्रसार के बारे में बात कर रहे थे।