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ये कैसा पेड़… जिसपर फल नहीं बल्कि मोबाइल लटकते हैं!

अबतक आपने पेड़ पर फल, सब्जियां और फूल लटके हुए देखे होंगे, लेकिन झारखंड में एक ऐसा गांव है जिसपर मोबाइल फोन लटके होते हैं।

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नई दिल्ली। अबतक आपने पेड़ पर फल, सब्जियां और फूल लटके हुए देखे होंगे, लेकिन झारखंड में एक ऐसा गांव है जिसपर मोबाइल फोन लटके होते हैं। यह सुनने में थोड़ा अजीब है लेकिन सौ फीसदी सच है। पेड़ों पर यहां लोग मोबाइल किसी दैवीय आपदा के कारण नहीं लकाते बल्कि नेताओं और अधिकारियों की लापरवाही की वजह से ऐसा करते हैं।


गांव से दूर टावर
झारखंड के गढ़वा से करीब 70 किलोमीटर दूर बड़गढ़ प्रखंड के लोग 21वीं में भी एक मोबाइल टावर के लिए तरस रहे हैं। गांव से कोसे दूर एक मोबाइल टावर है जिसके सिग्नल गांव तक नहीं आ पाता। इस समस्या समाधान गांव वालों ने खोज निकाला है।


दिनभर पेड़ पर टांगा होता है मोबाइल
दरअसल गांव के बाहर इस पेड़ है जिसके आसपास मोबाइल नेटवर्क एरिया है। इस पेड़ के पास आते मोबाइल ने टावर के सिग्नल आने लगते हैं। इसी वजह से ग्रामीण अपने मोबाइल फोन इस पेड़ पर बांधे रहते हैं। फोन आने पर घंटी बजती है तो वो दौड़कर फोन रिसिव कर लेते हैं और फिर वहीं टांग देते हैं।


फोन रिसीव करने के लिए लगती है शिफ्ट
ग्रामीणों का कहना है कि हर वक्त कोई पेड़ के पास नहीं बैठ सकता इसीलिए यहां शिफ्ट में लोगों की ड्यूटी लगाई जाती है। गांव के कुछ लोग पेड़ के नीचे बैठते हैं और किसी भी मोबाइल की घंटी बजने पर उसे रिसीव कर लेते हैं और मैसेज आगे बढ़ा देते हैं।


कहां है डिजिटल इंडिया
इलाके के लोगों का कहना है कि देश में डिजिटल इंडिया शोर है लेकिन हमारे गांव में मोबाइल में नेटवर्क तक नहीं आता है। कई बार इसे लेकर जिम्मेदार अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती है।

मोबाइल पर बात करने के लिए पेड़ पर चढ़ गए मंत्री जी
केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल अपने संसदीय क्षेत्र बीकानेर के दौर में क्षेत्र के धोलिया गांव पहुंचे थे। यहां ग्रामीणों ने मेघवाल से बिजली, पानी समेत मोबाइल का नेटवर्क नहीं मिलने की बात कही। इस पर मेघवाल ने अफसरों को मोबाइल से फोन मिलाया, लेकिन नेटवर्क नहीं होने के कारण फोन नहीं मिल पाया। इसके बाद ग्रामीणों ने मेघवाल से पेड़ पर चढऩे की बात कही। इसके बाद ग्रामीण एक सीढ़ी लेकर आए और पेड़ के सहारे लगाई। फिर मंत्री महोदय सीढ़ी के सहारे पेड़ पर चढ़कर अफसरों से बात की और जल्द से जल्द गांव में नेटवर्क की समस्या दूर करने को कहा। कुछ महीने बाद बीएसएनएल के अधिकारियों ने गांव का मुआयना किया और टावर लगा दिया।

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