सर्वेक्षण में यह बात भी निकलकर सामने आई कि 92 फीसदी मतदाता उच्च शिक्षित प्रत्याशी को आगामी चुनावों में मत देना पसंद करेंगे। सर्वेक्षण के आंकड़ों से निकले परिणाम को प्रसारित करने वाली संस्था 'एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉम्र्स' की ओर जारी वक्तव्य में कहा गया है, 97 फीसदी मतदाताओं ने इस बात पर निराशा जताई कि स्थानीय निकाय चुनावों में खड़े अधिकतर प्रत्याशी हाईस्कूल पास नहीं होते।
इसी महीने 5,100 प्रतिभागियों से उनकी प्रतिक्रियाएं ली गईं, जिसमें 86 फीसदी लोगों का मानना है कि अधिकतर प्रत्याशी सिर्फ इसलिए चुनाव लड़ते हैं, क्योंकि वे राजनीतिक परिवारों से होते हैं। एडीआर ने अपने वक्तव्य में कहा, 80 फीसदी मतदाताओं का मानना है कि अमूमन प्रत्याशी भ्रष्ट होते हैं और 85 फीसदी का मानना है कि धनी प्रत्याशी पैसे के बल पर चुनाव जीत जाते हैं।
वक्तव्य में आगे कहा गया है, हालांकि मत देते वक्त मतदाता भ्रष्टाचार को बहुत तवज्जो नहीं देते। परिषदीय चुनावों और नगर पंचायत चुनावों में मत देने के योग्य 86 फीसदी मतदाताओं का मानना है कि प्रत्याशियों के जीतने में उनकी ईमानदार छवि से ज्यादा विकास के मुद्दे पर उसकी निपुणता ज्यादा काम करती है। महाराष्ट्र के 36 में से 33 जिलों में नवंबर में स्थानीय निकाय के चुनाव होने हैं। 27 नवंबर से शुरू होने वाले ये चुनाव चार चरणों में आठ जनवरी, 2017 तक चलेंगे।