
नई दिल्ली। जम्मू एवं कश्मीर में अब जल्द ही आतंकियों का सफाया होने वाला है। इसकी वजह भारतीय सेना में शामिल होने वाले 500 से ज्यादा आयरन मैन (Iron Man) हैं, जो किसी भी विपरीत परिस्थिति में आतंकियों के बीच घुसकर उनका काम तमाम कर देंगे। रक्षा मंत्रालय ने इसके लिए प्रक्रिया शुरू भी कर दी है।
सूत्रों के मुताबिक भारतीय सेना को जम्मू-कश्मीर में आतंकी वारदातों-हमलों-मुठभेड़ों के दौरान मदद देने के लिए Iron Man जैसा काम करने वाले जंगी रोबोट्स मिलने वाले हैं। यह जंगी रोबोट्स घेराबंदी और खोजबीन-तलाशी अभियान चलाने, विपरीत हालात-गोलीबारी के बीच आतंकियों के गढ़ में घुसने के साथ ही किसी इमारत में छिपे आतंकियों पर ग्रेनेड फेंकने का काम बखूबी करेंगे।
रक्षा मंत्रालय ने सबसे पहले जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना को आतंक के सफाए के लिए 550 ऐसे जंगी रोबोट्स दिलाने की प्रक्रिया पर काम चालू कर दिया है। जम्मू-कश्मीर में होने वाले हमलों का कड़ा जवाब देने के लिए निगरानी और जंग दोनों के लिए बनाए जाने वाले एक रोबोट यूनिट का कम से कम सेवा काल 25 वर्ष का होगा।
भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह रोबोट्स सीढ़ियां चढ़ने, रास्ते में आने वाली तमाम तरह की बाधाओं को पार करने में सक्षम होने के साथ ही आतंकियों के ऊपर ग्रेनेड भी फेंक सकते हैं।
अधिकारी ने बताया, "यह रोबोट्स इतने मजबूत और उन्नत हैं कि कम से कम 20 सेंटीमीटर गहराई के पानी को भी पार करके जा सकते हैं। घाटी में घेराबंदी और तलाशी अभियान के दौरान यह रोबोट्स सुरक्षा पंक्ति में सबसे आगे मौजूद होंगे और जान के नुकसान से बचाएंगे। ये आतंकियों द्वारा की जाने वाली घुसपैठ के दौरान हमारी सैन्य टुकड़ी के जान-माल के नुकसान को भी रोकेंगे।"
रक्षा मंत्रालय ने निगरानी वाले रोबोट्स बनाने के लिए भारतीय उद्योगों को भी बुलाया, ताकि उनके उत्पाद देख सकें। मंत्रालय का मुख्य जोर स्वदेशी तकनीक और उपकरणों पर है ताकि रक्षा उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम की जा सके।
बताया जा रहा है कि मंत्रालय ने सेना को रोबोट्स दिलाने की यह प्रक्रिया राष्ट्रीय राइफल्स के महानिदेशक की मांग पर शुरू की है। जवाबी कार्रवाई के लिए भारत की प्रमुख सेना राष्ट्रीय राइफल्स 1 अक्टूबर 1990 को बनी थी, जब जम्मू एवं कश्मीर में आतंकवाद अपने चरम पर था और स्थानीय पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स इसे रोक नहीं पा रही थीं। यह फोर्स केवल घाटी में आतंक-रोधी कार्रवाई में ही जुटी है।
अधिकारी ने आगे बताया कि इस रोबोटिक सर्विलांस यूनिट में "रीयल टाइम इंटेलीजेंस इनपुट देने की भी क्षमता होगी, जो राष्ट्रीय राइफल्स के रिहायशी और व्यावसायिक इलाकों में आतंकियों के जुटे होने के दौरान चल रही कार्रवाई में मदद करेगी।" यानी आतंकियों के मौजूद होने की जानकारी मिलते ही सेना की टुकड़ी पहुंचने से पहले यह रोबोट्स आतंकियों की लोकेशन में जाकर वहां की गतिविधि, हथियार, संख्या आदि की तुरंत जानकारी सीधे सिस्टम के जरिये देते रहेंगे।
राष्ट्रीय राइफल्स इन रोबोट्स को जरूरी युद्ध के हथियारों के साथ देने के लिए कह रही है, ताकि जवाबी कार्रवाई के लिए इनका इस्तेमाल किया जा सके। सेना के अधिकारी ने कहा, "यह रोबोट्स मनचाहे लक्ष्य को भेदने के लिए उचित हथियारों से भी जरूर लैस होंगे, जैसे- जहां पर आतंकी छिपे हैं वहां पर ग्रेनेड से हमला या फिर ऐसा ही कुछ और।"
इन रोबोट्स में एक लॉन्च यूनिट, दिन-रात में साफ तस्वीर लेने वाला सर्विलांस कैमरा और 150-200 मीटर की दूरी तक संचार के लिए ट्रांसमिशन सिस्टम भी लगा होगा।
इसके साथ ही यह हल्का, दमदार, आतंकियों की गोलीबारी-हमले को सहने के लिए शॉकप्रूफ और आसानी से एक स्थान से दूसरी जगह ले जाने लायक (पोर्टेबल) भी होगा। अधिकारी के मुताबिक, "इसे चाहरदीवारी के बाहर 150-200 मीटर की दूरी तक बिल्कुल साफ तस्वीर-वीडियो भेजने में सक्षम और 360 डिग्री तक घूमने वाला, ऊपर-नीचे होने वाला भी होना चाहिए।"
सेना को मिलने वाले इस अत्याधुनिक निगरानी-जंगी रोबोट्स में दी गई खूबियों की अगर तुलना की जाए, तो यह काफी कुछ आयरन मैन जैसा ही लगता है। मार्वल यूनिवर्स का सुपर हीरो कैरेक्टर आयरन मैन हालांकि आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस और उड़ने में भी सक्षम है, जो यह रोबोट्स नहीं होंगे।
Updated on:
18 Nov 2019 05:54 pm
Published on:
18 Nov 2019 05:45 pm
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