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जानिए क्या है जेनेवा संधि और कारगिल युद्ध के समय कैसे भारत ने अपने पायलट को पाकिस्तान से सुरक्षित छुड़वाया था

लापता पायलट अभिनंदन को जेनेवा संधि के तहत लाया जा सकता है भारत कारगिल युद्ध के दौरान भी जेनेवा संधि के जरिए भारतीय पायलट की हुई थी वापसी पायटल नचिकेता के साथ नहीं हुआ था कोई दुर्व्यवहार

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जानिए क्या है जेनेवा संधि और कारगिल युद्ध के समय कैसे भारत ने अपन पायलट को पाकिस्तान से सुरक्षित छुड़ावाया था

नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना की एयर स्ट्राइक के बाद से ही भारत और पाकिस्तान के बीच स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है। जैश के ठिकानों को तबाह करने के एक दिन बाद बुधवार को बौखलाए पाकिस्तान ने भारतीय सेना को निशाना बनाने की कोशिश की, जिममें वायुसेना के एक मिग-21 विमान का पायलट अभिनंदन लापता हो गए। पाकिस्तान सरकार का दावा है कि उसने पायलट को बंधक बना लिया है। उनका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसके बाद उनकी सुरक्षा और वापसी की मांग उठने लगी है। लेकिन ऐसा दावा किया जा रहा है कि अभिनंदन को पाकिस्तान में कुछ नहीं हो सकता। अंतरराष्ट्रीय क़ानून जेनेवा कन्वेंशन के तहत कोई भी देश युद्धबंदियों से अमानवीय व्यवहार नहीं कर सकता। चलिए आपको बताते हैं कि आखिर यह जेनेवा संधि है क्या और कैसे कारगिल युद्ध के दौरान भरात ने अपने पायलट को पाकिस्तान से सुरक्षित छुड़ावाया था।

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क्या हुआ था कारगिल युद्ध के सामय

करगिल युद्ध के दौरान एक 26 वर्षीय फ्लाइट लेफ्टिनेंट के. नचिकेता पाकिस्तान के कब्जे में थे और बाद में उन्हें भारत को सौंप दिया गया। भारतीय उच्चायुक्त रहे पार्थसारथी ने एक मीडिया हाउस से बात करते हुए बताया कि करगिल युद्ध के समय प्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता मिग एयरक्राफ्ट उड़ा रहे थे। वह मिग से आक्रमण कर रहे थे, लेकिन उन्हें आदेश था कि वह LoC के पार नहीं जाएंगे। लेकिन जब नीचे आए तो मिसाइल ट्रैक से उनको उतारा गया और उसी दौरान पाकिस्तान ने उन्हें अपने कब्जे में ले लिया। फिर कुछ दिन बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की तरफ से एक संदेश मिला। इस संदेश में उस समय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ ने कहा कि हम आपके पायलट नचिकेता को रिहा करना चाहते हैं।

पार्थसारथी ने बताया कि यह कदम पाकिस्तान की तरफ से सद्भाव का संकेत था। उन्होंने बताया कि मैंने पाकिस्तान सरकार से नचिकेता से मिलने का प्रस्ताव रखा। तब पाकिसातन ने मुझे जिन्ना हॉल में आने को कहा। पार्थसारथी ने बताया कि मुझे उस समय पता चला कि जिन्ना हॉल में तो प्रेस कॉन्फ्रेंस होती है। इसके बाद मैंने पाकिस्तान सरकार से पूछा कि क्या आप हमारे पायलट की वापसी मीडिया के सामने करना चाहते हैं तो उनकी तरफ से हां में जवाब आया, जिस पर मैंने ऐतराज जताया। मैंने उनसे साफ कह दिया, जो युद्धबंदी आपके यहां हैं उसनो रिहा करते समय अगर मीडिया रहेगा तो मैं इसे कभी स्वीकार नहीं करूंगा। अगर आप किसी युद्धबंदी को दुनिया के मीडिया के सामने उदाहरण बनाकर पेश करेंगे तो मैं इसे स्वीकार नहीं कर सकता।

उस दौरान पार्थसारथी ने पाकिस्तान से नचिकेता को निजी तौर पर देने के लिए कहा। इसके बाद उन्होंने पूरा मामला उस समय की भारत सरकार को बताया। केंद्र मैं बैठी सरकार ने मेरे फैसले को सही ठहराया। फिर पाकिस्तान की तरफ से फोन आया और उनसे पूछा गया कि आप बताएं कि आपके पायलट को कैसे छोड़ा जाए। उस दौरान पार्थसारथी ने खुले शब्दों में पाकिस्तान से कहा कि आप ( पाकिस्तान) पर से हमारा विश्वास उठ चुका है। आप अगर हमारे पयलट को छोड़ाना चाहते हैं तो उसे भारतीय दूतावास में छोड़े फिर मैं उनका चार्ज ले लूंगा। इसके बाद पायलट नचिकेता को दूतवास लाया गया और उन्होंने उनका चार्ज संभाला।

उस रात नचिकेता को एयर कमोडोर जसवाल के घर ले जाएया गया। उसके अगले दिन पायलट को वाघा बॉर्डर लाया गया और सेना के सुपुर्द कर दिया गया। उन्होंने बताया कि नचिकेता लगभग दो हफ़्ते से पाकिस्तान के कब्जे़ में रहे। इस दौरान पाकिस्तान ने हमारे पायलट के साथ कोई दुर्व्यवहार नहीं किया। अगर पाकिस्तान ऐसा कुछ करता तो यह युद्धबंधी कानून जेनेवा संधि का उल्लंघन होता।

पार्थसारथी ने बुधवार से लापता पायलट अभिनंदन के बारे में बताया कि यदि पाकिस्तान के कब्जे़ में आने के बाद उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ तो यह अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन है। सोशल मीडिया में पायलट से जुड़ी जिस तरह की तस्वीरे चल रही हैं यह पूरी तरह से जेनेवा संधि नियमों को तोड़ना कहलाएगा। नचिकेता के मामले में उनसे कोई दुर्व्यवहार नहीं हुआ था। जिस तरह नचिकेता को रिहा करवाया गया था उसी तरह अभिनंदन के लिए कार्रवाई होनी चाहिए।

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क्या है जेनेवा संधि

जेनेवा संधि के अनुसार युद्धबंदियों पर या तो मुकदमा चलाया जा सकता है या फिर हालात शांत होने के बाद उन्हें लौटा दिया जाता है। हालांकि पकड़े जाने पर युद्धबंदियों को अपना नाम, सैन्य पद और नंबर बताने का प्रावधान रखा गया है। हालांकि कुछ देशों ने जेनेवा संधि का अतिक्रमण भी किया है।

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