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घाटी में कश्मीरी पंडितों का ‘हितैषी’ था आतंकी रियाज नायकू, सुरक्षाबलों को 2 साल से दे रहा था चकमा

Highlight - आतंकी रियाज नायकू ( Riyaz Naikoo ) के सिर पर था 12 लाख रुपए का ईनाम - आर्मी ( Indian Army ) के रिकॉर्ड में A++ कैटिगिरी का आतंकी था रियाज नायकू

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riyaz naikoo

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नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर ( Jammu Kashmir ) का मोस्ट वॉन्टेड आतंकी रियाज नायकू ( Riyaz naikoo ) आखिरकार भारतीय सुरक्षाबलों की बंदूक का निशाना बन ही गया। बुधवार को अवंतीपोरा में हिजबुल मुजाहिद्दीन का कमांडर रियाज नायकू सुरक्षाबलों के साथ एनकाउंटर में मारा गया। इस दौरान उसका एक साथी भी मारा गया है।

कश्मीरी पंडितों का हितैषी था रियाज नायकू!

आपको बता दें कि वैसे तो रियाज नायकू घाटी में आतंक का सबसे खूंखार चेहरा था, लेकिन वो कश्मीरी पंडितों का 'हितैषी' भी था। दरअसल, रियाज नायकू ने पिछले साल एक वीडियो जारी किया था, जिसमें उसने कश्मीरी पंडितों के घाटी में बसने का स्वागत किया था। उस वीडियो में रियाज ने कहा था कि वो लोग कश्मीरी पंडितों के दुश्मन नहीं हैं। उसने कहा था कि अगर घाटी में कश्मीरी पंडित वापस आते हैं तो वो उनका स्वागत करेगा। रियाज नायकू को हिजबुल मुजाहिद्दीन में उसूलपरस्त आतंकी माना जाता था।

रियाज ने शुरू की थी आतंकियों के जनाजे में 'गन सैल्यूट' की शुरूआत

इसके अलावा उसने आतंकियों के बीच 'गन सैल्यूट' की एक परंपरा शुरू की थी। इसकी शुरूआत उसने आतंकी बुरहान वानी के जनाजे में की थी। इस परंपरा में आतंकी के मारे जाने के बाद उसके साथ उसके जनाजे में बंदूकों से फायरिंग कर मरने वाले को श्रद्धांजलि देते हैं। अपनी इस इमेज से रियाज ने दक्षिण कश्मीर में कई युवा आतंक की तरफ से आकर्षित हुए थे और आतंक की राह पकड़ी थी।

आर्मी रिकॉर्ड में A++ कैटिगरी का आतंकी था नायकू

आपको बता दें कि रियाज नायकू साल 2016 में उस वक्त चर्चाओं में आया था, जब आतंकी बुरहान वानी के जनाजे में उसे देखा गया था। भारतीय सेना के रिकॉर्ड में नायकू A++ कैटिगरी का आतंकी था और उसके सिर पर 12 लाख रुपए का ईनाम भी था। रियाज को पिछले साल आतंकी सबजार भट की मौत के बाद उसे हिजबुल मुजाहिदीन का कमांडर बनाया गया था।

रियाज नायकू का परिवार मान चुका था उसे मरा हुआ

पिछले साल रियाज अहमद नायकू के पिता ने बताया था कि उनका बेटा इंजीनियर बनना चाहता था। वह मैथ्स का टीचर भी था और उसे कंस्ट्रक्शन के काम में भी रुचि थी। परिवार से बातचीत में पता चला कि पिता उसे उसी दिन मरा हुआ मान चुके थे, जिस दिन वह हिजबुल में शामिल हुआ। वह बेटे को याद करते हुए कहते हैं, 'उसे 12वीं में 600 में से 464 नंबर आए थे।