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कौन हैं जस्टिस इंदु मल्होत्रा जो पूरा भी नहीं कर पाईं अपना विदाई भाषण, फिर CJI ने कही ये बड़ी बात

HIGHLIGHTS Justice Indu Malhotra Retirement: अपने विदाई भाषण में भावुक होने वालीं सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस इंदु मल्होत्रा 27 अप्रैल 2018 को सर्वोच्च न्यायालय की जज बनीं थीं। जस्टिस मल्होत्रा के पिता ओम प्रकाश मल्होत्रा सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील थे।

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Who is Justice Indu Malhotra That could not complete her farewell speech (Symbolic Image)

नई दिल्ली। किसी संस्था या संगठन के साथ जुड़कर लंबे अर्से तक देशहित और समाजहित में काम करना अपने आप में एक सुखद अनुभव होता है, लेकिन जब लंबे समय तक सेवा देने के बाद रिटायर होते हैं तो वह पल बहुत ही भावुकभरा होता है। एक अच्छे और सच्चे कर्तव्यनिष्ठ वैयक्ति के लिए विदाई का पल हमेशा भावनात्मक रूप से जुड़ा होता है।

ऐसा ही एक भावुक पल देश की सर्वोच्च अदालत में शुक्रवार को देखने को मिला। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस इंदु मोल्होत्रा अपने कार्यकाल के अंतिम दिन विदाई भाषण देते हुए भावुक हो गईं। वह इस कदम भावुक हुईं कि अपना विदाई भाषण भी पूरा नहीं कर सकीं। इस विशेष मौके पर चीफ जस्टिस एसएस बोबड़े ने स्थिति को संभाला और फिर जस्टिस मल्होत्रा को कहा कि वे फिर आगे कभी अपना अधूरा विदाई भाषण पूरा करें।

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अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने भावुकता भरे इस पल में जस्टिस मल्होत्रा की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा देश के लिए यह एक विडंबना है कि अच्छे व सच्चे जज बहुत जल्द ही रिटायर हो जाते हैं। वेणुगोपाल ने इस मौके पर न्यायधीशों के रिटायरमेंट की आयु सीमा बढ़ाने की भी वकालक की और कहा कि अब समय गया है कि जजों की रिटायरमेंट आयु 70 साल की जानी चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि जस्टिस मल्होत्रा को यहां (सुप्रीम कोर्ट) कम से कम 10 साल और काम करना चाहिए था। लेकिन यह दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश के शीर्ष अदालत में जज 65 साल की आयु में ही रिटायर हो जाते हैं।

कौन हैं जस्टिस इंदु मल्होत्रा

आपको बता दें कि अपने विदाई भाषण में भावुक होने वालीं सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस इंदु मल्होत्रा 27 अप्रैल 2018 को सर्वोच्च न्यायालय की जज बनीं थीं। जस्टिस मल्होत्रा के जज बनने में सबसे खास और अहम बात ये है कि आजाद भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था कि कोई महिला अधिवक्ता वकील से सीधे सुप्रीम कोर्ट की न्यायधीश बनी हो।

करीब तीन साल तक देश की सेवा करने के बाद शुक्रवार (12 मार्च 2021) को जस्टिस मल्होत्रा रिटायर हो गईं। जस्टिस मल्होत्रा के पिता ओम प्रकाश मल्होत्रा सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील थे। अपने कार्यकाल के आखिरी दिन जस्टिस मल्होत्रा चीफ जस्टिस एसएस बोबड़े की पीठ में बैठीं। उनके कद का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि उन्हें विदाई देने के लिए अटॉर्नी जनरल समेत सर्वोच्च न्यायालय के कई वरिष्ठ अधिवक्ता मौजूद रहे।

इस खास पल में पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने जस्टिस इंदु मल्होत्रा की जमकर तारीफ की। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने भी तारीफ करते हुए कहा कि वे हमेशा से वकीलों के लिए एक प्रेरणादायी रही हैं।

जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने सबरीमाला मामले में दिया था अलग फैसला

आपको बता दें कि जस्टिस मल्होत्रा अपने करीब तीन साल के कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं। लेकिन कुछ केस ऐसे हैं जो हमेशा के लिए याद किए जाएंगे। इन्हीं में से एक है सबरीमाला केस। सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर पूरे देश में जारी सियासत और बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने बाकी सभी जजों से अलग फैसला देकर सबको चौंका दिया था।

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केके वेणुगोपाल ने बताया कि केरल के चर्चित सबरीमाला मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस इंदु मल्होत्रा ही वह इकलौती जज थीं, जिन्होंने बाकी अन्य चार पुरुष न्यायाधीशों से अलग राय जाहिर की थी। उन्होंने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश देने की मांग को गलत बताया।

सुनवाई के दौरान चार पुरूष न्यायधीशों ने इस बात का समर्थन किया कि महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की इजाजत मिलनी चाहिए, वहीं जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने इसके विपरित राय जाहिर की। आपको बता दें कि सदियों से सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की इजाजत नहीं है। ऐसे में कुछ संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर महिलाओं के प्रवेश की इजाजत मांगी थी।


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