
quation
नई दिल्ली। आज विश्व जनसंख्या दिवस है। एक अनुमान के मुताबिक भारत की जनसंख्या लगभग 133 करोड़ है। मौजूदा जनसंख्या वृद्धि की दर पहले की तरह जारी रहा तो वर्ष 2028 तक देश की आबादी चीन से अधिक हो जाएगी। यूएन की एक रिपोर्ट में भी इस बात का उल्लेख किया गया है। यह स्थिति हमारे लिए हर लिहाज से चिंताजनक है। यह इस बात का भी संकेतक है कि जनता पार्टी की सरकार ने 40 साल पहले बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने के लिए छोटा परिवार सुख का आधार पर जोर दिया था। इन बात को देशवासी आज तक समझ नहीं पाए। यही वजह है कि विशाल आबादी हमारे सामने सुरसा की तरह मुंह बाए खड़ी है।
66 साल से जारी है एफडब्लूपी
स्वतंत्रता के पश्चात वर्ष 1949 में भारत में पारिवारिक नियोजन कार्यक्रम का गठन किया गया था। वर्ष 1952 में पूरे देश में परिवार नियोजन कार्यक्रम शुरू किया गया। 1966 में स्वास्थ्य मंत्रालय ने परिवार नियोजन का एक अलग विभाग बनाया था। जनता सरकार ने वर्ष 1977 में एक नई जनसंख्या नीति का गठन किया था। सरकार ने कहा कि इस नीति को मजबूरी से नहीं बल्कि स्वेच्छा से स्वीकार करना चाहिए। जनता सरकार ने परिवार नियोजन विभाग का नाम बदलकर 'परिवार कल्याण कार्यक्रम' रख दिया था। यह एक केंद्रीय प्रायोजित कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम के लिए केंद्र सरकार देश के सभी राज्यों के लिए 100% सहायता प्रदान करती है। इसके बावजूद वोट बैंक की नीतियों और बेटों की चाह ने इस योजना को अभी तक सफल नहीं होने दिया।
जनसंख्या वृद्धि पर इसलिए नहीं लगा लगाम
यूएन की रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि पिछले कुछ दशकों में परिवार नियोजन और परिवार कल्याण कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन के कारण जनसंख्या वृद्धि की दर धीमी हो गई है, लेकिन फिर भी चीन की तुलना में भारत की जनसंख्या दर बहुत तेजी से बढ़ रही है। राष्ट्रीय प्रजनन दर अभी भी उच्च है, जो कि भारत की दीर्घकालिक जनसंख्या की वृद्धि में कारगर भूमिका निभा रहा है।
जानकारी का सख्त अभाव
जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में सफल परिवार नियोजन कार्यक्रमों के बावजूद भारत को एक लंबा रास्ता तय करना बाकी है। भारत सरकार इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए परिवार नियोजन पर सबसे ज्यादा जोर दिया है। लेकिन सामूहिक जागरूकता और भागीदारी की कमी के कारण हम इस लक्ष्य को अभी तक हासिल नहीं कर पाए हैं। ***** असमानता, बेटियों से ज्यादा बेटों पर प्राथमिकता, जीवन-यापन के मानक में कमी, गरीबी, आबादी को लेकर समाज में व्याप्त दकियानूसी विचार, धार्मिक मान्यताओं जैसे कारण आज भी जनसंख्या वृद्धि के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। इन बाधाओं को जागरूकता के बल पर ही दूर करना संभव है।
Published on:
11 Jul 2018 01:49 pm
बड़ी खबरें
View Allविविध भारत
ट्रेंडिंग
