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सबरीमाला मंदिर में प्रवेश कर इतिहास बनाने वाली महिला पहुंची आश्रय गृह, घर में घुसने की नहीं मिली अनुमति

सबरीमला मंदिर में भगवान अयप्‍पा के भक्‍तों को नाराज कर प्रवेश करने का सीधा असर कनक दुर्गा की जिंदगी देखने को मिलने लगा है। अब 39 साल की कनक दुर्गा को उनके ससुराल वालों ने घर में घुसने की इजाजत नहीं दी।

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सबरीमाला मंदिर में प्रवेश कर इतिहास बनाने वाली महिला पहुंची आश्रय गृह, घर में प्रवेश की नहीं मिली अनुमति

नई दिल्‍ली। सबरीमाला मंदिर में प्रवेश कर इतिहास बनाने वाली 39 साल की कनक दुर्गा को उनके ससुराल वालों ने बेघर कर दिया है। अब उन्‍हें घर में घुसने की इजाजत नहीं है। एक सप्‍ताह पहले कनक दुर्गा की सास पर उनसे मारपीट करने का आरोप लगा था, जिसके बाद उन्हें कोझिकोडे मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराना पड़ा था। कनक दुर्गा ने अपने ससुराल वालों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। अब यह मामला अदालत में विचाराधीन है। लोगों को अदालत के आदेश का इंतजार है।

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सास पर लगाया था मारपीट का आरोप
उपचार के बाद जब स्‍थानीय पुलिस कनक दुर्गा को अस्पताल से लेकर घर पहुंची तो पाया कि उनके पति अपने दो बच्चे और मां के साथ घर पर ताला लगाकर कहीं चले गए हैं। कनक दुर्गा को फिलहाल अब पुलिस की निगरानी में सरकारी आश्रय गृह में रखा गया है। इससे पहले कनक दुर्गा ने अपनी सास पर मारपीट का आरोप लगाया था। सबरीमला मंदिर में भगवान अयप्पा के दर्शन के बाद 44 वर्षीय कनकदुर्गा सुरक्षा कारणों से पिछले दो हफ्ते से छिपी हुईं थीं और 15 जनवरी को पेरिनथलमन्ना स्थित अपने घर पहुंची थीं। पुलिस के अनुसार घर में घुसने के साथ ही कनकदुर्गा की अपनी ससुराल वालों से बहस हो गई जो मंदिर में उसके प्रवेश का जोरदार विरोध कर रहे थे। पुलिस ने बताया था कि उनकी सास ने लकड़ी के फट्टे से कथित तौर पर पिटाई की और उन्हें बाद में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उन्होंने बताया कि उन्हें सिर में चोट आई थी और मल्लपुरम जिले के एक सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

मायके वाले भी विरोध में
कनक दुर्गा ने मीडिया को बताया था कि मेरी सास ने लकड़ी के फट्टे से मुझे बुरी तरह पीटा। हालांकि उनकी बूढी सास को भी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिन्होंने बाद में आरोप लगाया कि कनक दुर्गा ने उनके साथ मार-पीट की। कनकदुर्गा के ससुराल वालों के साथ-साथ मायके वाले भी मंदिर में प्रवेश के उनके फैसले का विरोध कर रहे हैं। बता दें कि कनक दुर्गा और बिंदु आमिनी ने सबरीमाला मंदिर में बतौर महिला पहली बार भगवान अयप्पा के दर्शन किए थे। इन दोनों महिलाओं को राइट विंग ग्रुप की तरफ से धमकी मिल रही थी। इसको देखते हुए इन्हें कोच्चि के एक गुमनाम जगह पर रखा गया था।