
10 महिलाएं जिन्होंने बदल दी दुनिया की तस्वीर
नई दिल्ली। दुनिया भर में महिलाओं ने अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर सफलता के कई ऐसे मुकाम हासिल किए हैं जो हर किसी के लिए मिसाल हैं। ऐसी कई महिलाएं हैं जिन्होंने दुनिया को अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। आज विश्व महिला दिवस है। इसलिए हम आपको बता रहे हैं राजनीति और समाजसेवा जैसे क्षेत्रों से जुड़ी कुछ ऐसी प्रभावशाली महिलाओं के बारे में जो सबके लिए एक उदाहरण हैं।
1. क्वीन एलिजाबेथ 2
महारानी एलिजाबेथ टू ब्रिटिश इतिहास में सबसे ज्यादा समय तक राज करने वाली सम्राज्ञी हैं। महारानी एलिजाबेथ का जन्म अप्रैल, 1926 को लंदन में प्रिंस अल्बर्ट (ड्यूक ऑफ यॉर्क) और एलिजाबेथ बोइस लियोन की राजकुमारी (एलिजाबेथ एलेक्जेंड्रा मैरी) के घर हुआ था। उन्होंने 1947 में ड्यूक ऑफ एडिनबर्ग के फिलिप माउंटबेटन से शादी की। 6 फरवरी, 1952 को वह रानी बन गईं और 2 जून, 1953 को उनकी ताजपोशी हुई। एलिजाबेथ द्वितीय प्रिंस चार्ल्स की मां हैं, जो सिंहासन के उत्तराधिकारी हैं। एलिजाबेथ टू राजकुमारों में विलियम और हैरी की दादी भी हैं। उन्होंने राज परिवार से जुड़ी परंपराओं को बनाए रखते हुए अपने शासनकाल को आधुनिक और जनता के प्रति संवेदनशील बनाने की कोशिश कीं और अपनी अलग पहचान बनाईं।
2. इंदिरा गांधी
भारत में इंदिरा गांधी आयरन लेडी के रूप में जानी जाती हैं। उनका जन्म 19 नवंबर, 1917 को देश के प्रतिष्ठित नेहरू परिवार में हुआ था। 1930 में उन्होंने वानर सेना का निर्माण किया। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जेल भी गईं। वह 1959 से 1960 तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष भी रहीं। 1966-1977 और 14 जनवरी, 1980 से 31 अक्टूर 1984 तक भारत की प्रधानमंत्री रहीं। इस बीच उन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध में न केवल बांग्लादेश को एक अलग राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में लाने में अहम भूमिका निभाई बल्कि पूर्वी पाकिस्तान हमेंशा के लिए पाकिस्तान से अलग हो गया।
3. एंजेला मर्केल
दुनिया की सबसे पॉवरफुल महिला एंजेला मर्केल को आयरन लेडी कहा जाता है। फ्रांस के लोग सरकोजी से ज्यादा उन्हें पसंद करते हैं। जर्मनी के आर्थिक सुधारों में मर्केल का अहम योगदान है। उन्हें जर्मनी की प्रथम महिला चांसलर होने का गौरव प्राप्त है। जर्मनी की स्वास्थ्य व्यवस्था और टैक्स सिस्टम में सुधार लाने का श्रेय भी उन्हें जाता है। मर्केल इसलिए भी चर्चा में रही हैं कि उन्होंने नाटो द्वारा लीबिया पर हवाई हमले में शामिल होने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। राजनीतिक रूप से मर्केल काफी मजबूत महिला मानी जाती हैं। मर्केल का जन्म पश्चिमी जर्मनी के हैमबर्ग में 17 जुलाई, 1954 को हुआ था। वर्ष 1989 में बर्लिन की दीवार गिरने के बाद मर्केल देश की राजनीति में अहम भूमिका निभाने के लिए उतरीं और डेमोक्रेटिक अवेकिंग चुनाव में जीत हासिल की। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। जर्मनी की क्रिश्चियन डेमोक्रैट पार्टी से जुड़ी मर्केल ने चौथी बार चांसलर का चुनाव जीतने के बाद कहा था कि वह 2021 में कार्यकाल समाप्त होने के बाद इस पद को छोड़ देंगी।
4. थेरेसा मे
थेरेसा मे वर्तमान में यूनाइटेड किंगडम की प्रधानमंत्री और कंजर्वेटिव पार्टी की नेता हैं। 1997 से मेडनहैड सीट से लगातार सांसद हैं। उन्हें एक उदार रूढ़िवादी विचारधारा का समर्थक माना जाता है। ब्रिटेन का यूरोपीय संघ से बाहर होने के मुद्दे पर पहले जनमत संग्रह और तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड कैमरून द्वारा इस्तीफा देने के बाद वह 13 जुलाई, 2016 को ब्रिटेन की दूसरी महिला प्रधानमंत्री बनीं थी। उनसे पहले मार्गरेट थैचर 1979 से 1990 तक ब्रिटेन की पहली महिला प्रधानमंत्री रहीं। अब उनके पास सबसे बड़ी चुनौती 29 मार्च तक संसद से यह प्रस्ताव पास कराने की है कि ब्रिटेन यूरोपियन यूनियन के साथ चलेगा या उससे अलग अलग होकर चलेगा।
4. सोनिया गांधी
कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी दुनिया में ताकतवर महिलाओं में शुमार किया जाता है। वह मौजूदा भारतीय राजनीति में प्रमुख स्थान रखती हैं। विरोधी उनके खिलाफ विदेश मूल का मुद्दा उठाते रहते हैं, लेकिन इसका असर उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कभी नहीं पड़ने दिया। कांग्रेस के 135 वर्षों के इतिहास में सबसे ज्यादा समय तक अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी का उन्होंने निर्वहन किया है। वह 1998 से 2018 तक कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष रहीं। उन्होंने पूर्व पीएम राजीव गांधी की हत्या के बाद ने केवल परिवार को संभाला बल्कि बहुत कम समय में भारतीय राजनीतिक पटल पर छा गईं। वर्तमान में वो यूपीए अध्यक्ष हैं और रायबरेली उत्तर प्रदेश से संसद हैं। उनका जन्म 9 दिसंबर, 1946 को लुसियाना वैनेतो इटली में हुआ था।
5. शेख हसीना
शेख हसीना का जन्म 28 सितंबर 1947 को तुंगीपारा बांग्लादेश में हुआ था। वह बांग्लादेश के महान स्वाधीनता सेनानी वहां के प्रथम राष्ट्रपति बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान की पुत्री हैं। जनवरी में चुनाव जीतकर वह बांग्लादेश की चौथी बार प्रधानमंत्री बनीं है। बांग्लादेश में चार बार प्रधानमंत्री बनने वाली वह पहली शख्सियत हैं। उनके पिता, मां और तीन भाई की 1975 के तख्तापलट में मारे गए थे। अवामी लीग पार्टी से जुड़ी शेख हसीना 2009 से बांग्लादेश की प्रधानमंत्री हैं।
6. वंगारी मथाई
पर्यावरण से जुड़े काम के लिए 2004 में शांति का नोबेल जीतने वाली केन्या की वंगारी मथाई नोबेल शांति पुरस्कार पाने वाली अफ्रीका की पहली महिला थीं। 1940 में पैदा हुईं मथाई ने 1977 में पर्यावरण के लिए अपनी मुहिम शुरू की। वह तब से ही केन्या के अहम लोगों में शुमार रहीं। वह जीवन भर पर्यावरण संरक्षण और अच्छे प्रशासन पर जोर देती रहीं। उनकी संस्था ग्रीन बेल्ट मूवमेंट ने पूरे अफ्रीका में 4 करोड़ पेड़ लगाए हैं। 1970 के दशक में उन्होंने केन्या में रेड क्रॉस का भी नेतृत्व किया। 2011 में उनकी मौत कैंसर से जूझते हुए नैरोबी के एक अस्पताल में हुई थी।
7. बेनजीर भुट्टो
बेनजीर भुट्टो का जन्म 21 जून, 1953 में जमींदार परिवार में हुआ था। उन्होंने अपने पिता जुल्फिकार अली भुट्टो की सियासी विरासत संभालते हुए पाकिस्तान की उथलपुथल भरी राजनीति में प्रवेश किया और 1988 में पहली बार देश की प्रधानमंत्री बनीं। 20 महीने बाद ही उन्हें भ्रष्टाचार के आरोप में इस पद से हटा दिया गया। 1993 में वह दूसरी बार देश की प्रधानमंत्री बनीं लेकिन 1996 में इस पद से फिर हटना पड़ा। 27 दिसंबर, 2007 को रावलपिंडी में राजनीतिक रैली के दौरान आत्मघाती बम विस्फोट और गोलीबारी में उनकी हत्या कर दी गई। पूरब की बेटी के नाम से जानी जाने वाली बेनजीर किसी भी मुसलिम देश की पहली महिला प्रधानमंत्री तथा दो बार चुनी जाने वाली पाकिस्तान की पहली प्रधानमंत्री थीं। वे पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की प्रतिनिधि तथा मुसलिम धर्म की शिया शाखा की अनुयायी थीं।
8. चंद्रिका कुमारतुंगा
चंद्रिका कुमारतुंगा का जन्म एक राजनीतिक परिवार में 29 जून, 1945 को हुआ थ। श्रीलंकन राजनीति की वह महान शख्सियत में शुमार हैं। वह श्रीलंका की पांचवीं राष्ट्रपति बनीं। उनके पिता सिरीमावो बंडारानाइक श्रीलंका के प्रधानमंत्री थे। उनके पिता की हत्या 1959 में हुई थी। उनकी मां सोलोमन बंडारानाइक सरकार की प्रमुख के रूप में सेवा करने वाली दुनिया की पहली महिला थीं। चंद्रिका कुमारतुंगा ने 1988 में पति की 1988 के बाद देश छोड़ दिया था। 1992 में श्रीलंका लौंटी और श्रीलंका फ्रीडम पार्टी में शामिल हो गईं। 1994 में वह चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री बनीं। 1999 में वह चुनाव जीतकर राष्ट्रपति बनीं। 2001 में उनकी पार्टी चुनाव हार गई, लेकिन वह कार्यकारी राष्ट्रपति बनीं रहीं। 2004 में उन्होंने संसद को भंग कर दिया और 2005 में राजनीति से सन्यास ले लिया।
9. मेगावती सुकर्णोपुत्री
मेगावती सुकर्णोपुत्री का जन्म 23 जनवरी, 1947 को हुआ था। वह इंडोनेशियाई राजनीतिज्ञ और विपक्षी दल पीडीआई-पी की नेता है। 23 जुलाई, 2001 से लेकर 20 अक्टूबर, 2004 तक इंडोनेशिया की राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभाला। उन्हें देश की पहली महिला राष्ट्रपति होने का गौरव हासिल था। इसके अलावा वे ऐसी पहली राजनीतिज्ञ हैं, जो इंडोनेशिया के स्वतंत्र होने के बाद पैदा हुईं। मेगावती इंडोनेशिया के पहले राष्ट्रपति सुकर्णो की पुत्री हैं।
Updated on:
08 Mar 2019 03:33 pm
Published on:
08 Mar 2019 03:09 pm
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