
Kabul airport
नई दिल्ली। काबुल एयरपोर्ट पर बम ब्लास्ट के लिए जिम्मेदार इस्लामिक स्टेट ऑफ खुरासान प्रांत ( ISIS-K ) से केरल से कम से कम 14 लोगों के जुड़े होने की सूचना सामने आई है। ताजा जानकारी के मुताबिक बम विस्फोट की घटना को अंजाम देने में आईएसआईएस-के आतंकियों के साथ ये लोग भी शामिल थे। इनका संबंध लश्कर ए तैयबा के साथ भी बताया जा रहा है। दो दिन पहले काबुल एयरपोर्ट के बाहर आत्मघाती बम विस्फोटों में 170 लोगों की मौतें हुई थी। इनमें 13 अमरीकी सैनिक भी शामिल थे।
काबुल एयरपोर्ट बम ब्लास्ट की घटना के दो दिन अब इसके लिए जिम्मेदार आतंकी संगठनों के साथ जुड़े अन्य देशों के नागरिकों की संलिप्तता भी सामने आने लगी है। हिन्दुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक तालिबान ने 14 केरलवासियों को बगराम जेल से मुक्त किया था। इन लोगों का संबंध आईएसआईएस-के ( ISIS-K ) और लश्कर ए तैयबा ( Lashkar-e-Taiba ) से भी है।
पश्तून आतंकी गुट ने 2 पाक नागरिकों को लिया था हिरासत में
सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि 26 अगस्त को काबुल में तुर्कमेनिस्तान दूतावास के बाहर एक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) डिवाइस को उड़ाने की कोशिश करने के आरोप में सुन्नी पश्तून आतंकवादी समूह ने दो पाकिस्तानी नागरिकों को हिरासत में लिया था। इनमें से एक के पास से IED बरामद हुआ था।
केरल के 14 लोगों में से 1 ने घर से साधा था संपर्क
तालिबान द्वारा बगराम जेल से मुक्त किए गए केरल के 14 में लोगों से एक निवासी ने अपने घर के लोगों से संपर्क किया था। जबकि 13 अभी भी ISIS-K आतंकवादी समूह के साथ काबुल में हैं। केरल के मलप्पुरम, कासरगोड और कन्नूर जिलों के कुछ लोग 2014 में सीरिया और लेवंत के मोसुल पर कब्जा करने के बाद भारत छोड़कर पश्चिम एशिया के जिहादी समूह में शामिल हो गए थे। उन्हीं में से कुछ केरलवासी अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत में आ गए और आईएसआईएस-के से जुड़ गए।
इस वजह से भारत सरकार की बढ़ी चिंता
केरल के लोगों का आईएसआईएस-के से लिंक सामने आने की सूचना ने भारत सरकार की चिंता बढ़ा दी है। ऐसा इसलिए कि तालिबान इन केरलवासियों का इस्तेमाल अफगानिस्तान में कर भारत की छवि धूमिल कर सकता है।
पाकिस्तान को है इस बात का इंतजार
फिलहाल, अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में अभी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। पाकिस्तान हक्कानी नेटवर्क के समर्थन से तालिबान पर इस बात कर दबाव बना रहा है कि सरकार को इंटरनेशनल कम्युनिटी से मान्यता के दिलाने के लिए पिछली सरकार के कुछ लोगों को 12 सदस्यीय परिषद में शामिल करना चाहिए। हालांकि, अफगानिस्तान के पड़ोसी तालिबान पर कोई भी निर्णय लेने से पहले अमरीका और अन्य नाटो सहयोगियों के इस्लामिक अमीरात से पूरी तरह से हटने का इंतजार कर रहे हैं।
Updated on:
28 Aug 2021, 11:49 PM IST
Published on:
28 Aug 2021, 11:41 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.