Afghan-US joint declaration: 14 महीने में अफगानिस्तान से अमरीकी सैनिकों की होगी वापसी

  • कतर ( Qatar ) में अमरीका-तालिबान ( America-Taliban ) के बीच अफगान शांति वार्ता ( Afghan Peace Talk ) पर समझौता
  • बीते 18 सालों से अफगानिस्तान ( Afghanistan ) में तालिबान-अमरीका के बीच चल रहा संघर्ष

दोहा। अफगानिस्तान ( Afghanistan ) में शांति बहाली को लेकर अमरीका-तालिबान ( America-Taliban ) के बीच कतर ( Qatar ) में शनिवार ( 29 फरवरी ) को समझौता हो रहा है। इस बीच अफगान-अमरीका की ओर से एक संयुक्त घोषणा की गई है।

साझा बयान में कहा गया है कि अमरीका अगले 14 महीने में अपने सैनिकों को अफगानिस्तान ( Afghanistan ) से वापस बुलाएगा। हालांकि इसमें एक शर्त ये रखी गई है कि यदि तालिबान अपनी प्रतिबद्धताओं को बरकरार रखने में सफल होता है, तो अमरीका और NATO 14 महीने के भीतर अफगानिस्तान से सभी सैनिकों को वापस करेगा।

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बयान में कहा गया है कि अमरीका अफगानिस्तान में अमरीकी सैन्य बलों की संख्या को 8,600 तक कम कर देगा और इस संयुक्त घोषणा व यूएस-तालिबान समझौते की घोषणा के 135 दिनों के भीतर अन्य प्रतिबद्धताओं को लागू करेगा।

कतर में अमरीका-तालिबान के बीच समझौता

आपको बता दें कि तालिबान के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए अमरीका और तालिबान दोनों पक्षों के प्रतिनिधिमंडल दोहा समारोह में पहुंचे हैं। इस मीटिंग में 50 देशों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है।

बीते 18 सालों से अमरीका और तालिबान के बीच अफागनिस्तान में संघर्ष का दौर चल रहा है, जिसमें अब तक कई अमरीकी सैनिकों की मौत हो चुकी है। इस बीच अब दोहा समझौते के तहत अमरीका चरणबद्ध तरीके से अफगानिस्तान से सैनिकों को निकालेगा।

साझा घोषणा में अमरीका ने अफगानिस्तान में इस्लामी गणतंत्र की सहमति से सैन्य अभियान जारी रखने की अपनी तत्परता की पुष्टि की, ताकि अल-कायदा, ISIS-K और अन्य अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों के अमेरिका या उसके सहयोगियों के खिलाफ हमले करने प्रयास को विफल किया जा सके।

अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ( US Secy of State Mike Pompeo ) ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि कतर का यह सम्मेलन तभी वास्तविक रूप से सफल बन गया जब तालिबान ने शांति बहाली को लेकर अल-कायदा और अन्य विदेशी आतंकवादी समूहों के साथ अपने संबंधों को समाप्त करने में रुचि दिखाई। उन्होंने कहा कि आज हम जिस समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे, वह इस प्रयास की सच्ची परीक्षा है।

 

उन्होंने यह भी कहा कि हम तालिबान पर उनकी प्रतिबद्धताओं के अनुपालन के लिए करीब से देखेंगे और उनके कार्यों के साथ ही हमारे सैनिकों की वापसी को लेकर जाचेंगे। इस तरह से हम यह सुनिश्चित करेंगे कि अफगानिस्तान फिर से अंतरराष्ट्रीय आतंकवादियों के लिए एक आधार के रूप में कभी कार्य न करे।

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Anil Kumar
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