
अमरीका ने भारत से मांगी माफी, 2प्लस2 वार्ता के लिए लगाई गुहार
नई दिल्ली। एक चौकाने वाली घटनाक्रम के तहत अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से बात की। उन्होंने फोन पर 2प्लस2 वार्ता को स्थागित करने को लेकर अफसोस जताया। साथ ही इस वार्ता के लिए नई तारीख, समय और स्थान तय करने का अपनी तरफ से प्रस्ताव रखा है। पोम्पिओ ने नए सिरे से वार्ता के लिए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की सहमति मांगी है। इसके बाद दोनों देश यथाशीघ्र वार्ता करने के लिए आपसी सुविधा वाली तारीख तलाशने को राजी हो गए हैं। इस बारे में 27 जून की देर रात विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट कर बताया कि अमरीका ने भारत के साथ होने वाली पहली 2+2 वार्ता को अपरिहार्य कारणों से हाल ही में स्थगित कर दिया था। लेकिन अमरीकी सरकार ने इस वार्ता के रणनीतिक अहमियत को समझते हुए अब खेद जताया है।
2018 में स्थगित किया था वार्ता
इस साल की शुरूआत में भी 2+2 वार्ता को स्थगित किया गया था। उस वक्त पोम्पिओ के विदेश मंत्री के तौर पर नियुक्ति की पुष्टि नहीं हुई थी। अप्रैल में पोम्पिओ को विदेश मंत्री बनाए जाने की पुष्टि हुई। इस वार्ता को दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंध बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। बैठक में रणनीतिक, सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिए जाने की उममीद है।
थाड तकनीक सौदे को लेकर होने थी वार्ता
भारत-अमरीका के बीच 2+2 वार्ता छह जुलाई को होने वाली थी। इसमें विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण अमरीकी विदेश मंत्री माइकल आर पोम्पिओ और अमरीकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस के साथ बैठक के लिए अमरीका जाने वाली थीं। इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि इस वार्ता के दौरान टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) सिस्टम के बारे में बातचीत होगी और रूस से करीब 39,000 करोड़ रुपए के एस-400 सौदे को रोकने के लिए अमरीका भारत को किफायती दाम पर अपने बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने के लिए मनाने की कोशिश कर सकता है। वार्ता स्थगित करने के बाद अमरीका को इस बात का डर सताने लगा है कि भारत रूस से इस तकनीक को हासिल कर उसकी उपेक्षा कर सकता है। थाड एक रक्षा तकनीकी है जिसे हासिल कर भारत चीन के खिलाफ अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है। साथ ही हिंद महासागर से लेकर दक्षिण चीन सागर तक चीन पर नजर रख सकता है।
क्या है 2प्लस2 वार्ता?
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जून 2017 में जब अमरीका की यात्रा पर गए थे, उस वक्त दोनों देशों के बीच रक्षा सौदों को लेकर बातचीत के इस नए प्रारूप पर सहमति बनी थी। इसके बाद से दोनों देश कई बार तारीखों पर विचार कर वार्ता का कार्यक्रम छह जुलाई को निर्धारित कर चुके थे। विदेश मंत्री सुषमा और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन अमरीका जाने की तैयारी भी पूरी कर चुकीं थीं। लेकिन दोनों देशों के बीच ट्रेड पर बने तनाव के बीच अचानक अमरीका ने अपरिहार्य कारण बताकर यह वार्ता स्थगित कर दी। पिछले हफ्ते भारत ने कहा था कि अमरीका द्वारा स्टील और एल्युमिनियम पर आयात कर बढ़ाने के विरोध में वह अमरीका से होने वाले 29 वस्तुओं के आयात पर टैक्स बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। वार्ता स्थगित करने के अमरीका के एकतरफा निर्णय से कुछ समय पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने आरोप लगाया था कि भारत कई वस्तुओं पर 100 फीसदी तक का आयात कर लगा रहा है।
Published on:
28 Jun 2018 09:30 am
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