
वॉशिंगटन। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान परमाणु समझौते से अलग होने के फैसले ने मध्य-पूर्व की राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए नये सवाल खड़े कर दिये हैं। हालांकि, इस करार में शामिल अन्य देश ट्रंप से सहमत नहीं है, इसलिए यह समझौता अभी कायम है, लेकिन ईरान पर अमरीका के कठोर आर्थिक प्रतिबंध फिर से लागू हो जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति और व्यापार के मोर्चे पर गंभीर तनावों की आशंकाएं बढ़ गयी हैं।
नए प्रतिबंधों की तैयारी में जुटा अमरीका
इस बीच अमरीका ने एक नया बड़ा फैसला लिया है। ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने से लिए अमरीका उस पर नए प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है। राष्ट्रपति कार्यालय की प्रवक्ता सराह सैंडर्स ने बुधवार को एक बयान जारी कर कहा कि हम यह सुनिश्चित करने के लिए सौ फीसदी प्रतिबद्ध हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हैं। हम उस पर अधिकतम दबाव डालने के लिए भारी प्रतिबंध लगाएंगे।
फिलहाल पुराने सभी प्रतिबंध रद्द
साराह ने कहा कि ईरान पर लगे पहले से मौजूद सभी प्रतिबंध रद्द हो गए हैं और हम अतिरिक्त यानी की नए प्रतिबंधों को जोडऩे की तैयारी कर रहे हैं जो अगले सप्ताह के शुरू में लागू हो सकते हैं।
जमकर लगे अमरीका विरोधी नारे
उधर ट्रंप के बयान के बाद ईरान में एंटी अमरीकन को लेकर जमकर विरोध प्रदर्शन हुआ। लोगों ने सड़कों पर उतरकर अमरीका के झंडे जलाए साथ ही जमकर नारेबाजी भी की। बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर जमा हो गए और अमरीका के रवैये की निंदा की।
कई देशों ने जताई आपत्ति
ईरान परमाणु समझौते से अलग होते हुए अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यह करार एकतरफा और दोषपूर्ण था। इससे ईरान के परमाणु आकांक्षाओं पर रोक लगाने में कामयाबी नहीं मिली है। हालांकि कई देश अमरीका के इस फैसले से सहमत नहीं हैं। अन्य कई प्रमुख देशों के नेताओं ने भी राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अमरीका के निर्णय पर अफसोस जताया है। उन्होंने अपने बयान में फ्रांस के साथ जर्मनी और ब्रिटेन को भी जोड़ा है।
Published on:
10 May 2018 11:19 am
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