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ट्रंप-किम की दोस्‍ती से चीन की बढ़ी चिंता

ट्रंप और किम की पहलीale मुलाकात ने दुनिया के देशों को जहां राहत मिली है वहीं चीन इसको लेकर गंभीर हो गया है।

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Dhirendra Kumar Mishra

Jun 14, 2018

kim trump

ट्रंप-किम की दोस्‍ती से चीन की बढ़ी चिंता

नई दिल्‍ली। राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन की सिंगापुर में हुई मुलाकात का असर दिखाई देने लगा है। किम और ट्रंप के बीच मुलाकात का वैसे तो असली विजेता चीन है लेकिन अब वही इस मुलाकात के बाद सबसे ज्‍यादा चिंतित हो उठा है। इसके पीछे मुख्‍य वजह कोरियाई प्रायद्वीप में चीन की मंशा अपने प्रभुत्‍व को पहले की तरह बनाए रखना है। चीन इस बात को लेकर इसलिए भी गंभीर हो गया है कि पहली मुलाकात में ही ट्रंप और किम ने दुनिया पर असर डालने वाला समझौता किया। इससे चीन को डर सताने लगा है कि कहीं उत्‍तर कोरिया उसके हाथ से निकल न जाए।

चीन की जीत
सिंगापुर में मुलाकात के बाद जब ट्रंप ने दक्षिण कोरिया के साथ संयुक्त युद्धाभ्यास रोकने और धीरे-धीरे दक्षिण कोरिया से अमरीकी सैनिक हटाने का ऐलान किया तो यह चीन की ही सबसे बड़ी जीत थी। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने बुधवार को मीडिया को बताया कि ट्रंप की सैन्यभ्यास को रोकने की घोषणा इस बात का सबूत है कि चीन का प्रस्ताव वैध है और यह दोनों पक्षों की चिंताओं से जुड़ा है। ऐसा इसलिए कि पेइचिंग दक्षिण कोरिया और जापान में अमरीकी सेना की मौजूदगी को पसंद नहीं करता है। कई बार कोरियाई प्रायद्वीप में वह अमरीकी सैन्‍य अभ्‍यास को रोकने की भी मांग कर चुका है। इस ड्रिल को उत्तर कोरिया हमेशा से अमरीकी घुसपैठ बताता आया है। अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में यूएस नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के लिए चीन की रणनीति बनाने वाले रायन हैस कहते हैं कि चीन उत्तरपूर्वी एशिया में विदेशी सेनाबल की तैनाती में कमी चाहता है ताकि वह वॉशिंगटन और उसके सहयोगी देशों के बीच फासला बढ़े।

नई रणनीति बनाने में जुटा चीन
ट्रंप-किम के बीच पेइचिंग उत्तर कोरिया पर अपने प्रभाव को बनाए रखने को लेकर भी सोच-विचार में लगा है। समिट के बाद राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से लगातार किम की तारीफ हो रही है। इससे चीन कई आशंकाओं से घिर गया है। ट्रंप ने किम को बेहद क्षमतावान व्यक्ति भी बताया और उत्तर कोरिया को परमाणु निरस्त्रीकरण के एवज में सुरक्षा गारंटी का भी वादा किया है। यही कारण है कि चीन ने उत्‍तर कोरिया को अपने प्रभाव में बनाए रखने के लिए नई रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। व्‍हाइट हाउस नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में पूर्व चाइना डायरेक्टर पॉल हैनले का कहना है कि अमरीका और उत्तर कोरिया के संबंधों में किसी भी तरह के सुधार को चीन अपना नुकसान मानेगा।। दोनों की मीटिंग के बाद चीनी विदेश मंत्रालय का बयान भी इन्‍हीं बातों को संदर्भित करने वाला था।