
अपने मोबाइल फोन का पासवर्ड पुलिस को नहीं बताया, तो हो सकती है 10 साल की जेल
निजी जानकारियों के लीक होने को करीब-करीब सारी दुनिया में एक बड़ा अपराध माना जाता है। ऐसी व्यक्तिगत जानकारियों के लीक होने की खबर से सारी दुनिया में हाय-तौबा मच जाता है और तमाम साइबर एक्सपर्ट्स इस बात में जुट जाते हैं कि ऐसी घटनाओं से कैसे बचा जाए। ऐसे में अगर कोई देश अपने ही नागरिकों से कहे कि अपने सोशल मीडिया अकाउंट के पासवर्ड पुलिस के साथ साझा करें, तो इस पर हैरान होना स्वाभाविक ही है। लेकिन यह सच है। अॉस्ट्रेलिया की संसद में पिछले दिनों एक बिल पेश किया गया, जिसके अनुसार अगर कोई व्यक्ति व्यक्तिगत डेटा पुलिस के साथ साझा नहीं करता है, तो उसे कड़ी सजा दी जाएगी।
वर्तमान में लागू कानून में 2 साल तक की सजा का है प्रावधान
दरअसल एक नए ऑस्ट्रेलियाई बिल में व्यक्तिगत डेटा को सौंपने से इंकार करने वालों के लिए कड़े दंड का प्रावधान करने की बात कही गई है। वहां के वर्तमान कानून में पहले से ही ऐसे लोगों के लिए दो साल तक की सजा का प्रावधान है, जो गंभीर अपराध के मामले में जांचकर्ताओं के साथ ऐसी जानकारियां साझा नहीं करते।
प्रस्तावित बिल में सजा का प्रावधान 10 साल तक किया गया
असिस्टेंट एंड एक्सेस बिल नाम के नए बिल में सजा का प्रावधान बढ़ाकर 10 साल तक कर दिया गया है। हालांकि अभी इस बिल पर जनता की राय जानी जा रही है और इस साल के अंत तक ही इस पर कोई अंतिम फैसला किया जाएगा। ऑस्ट्रेलिया के गृह मंत्रालय का कहना है कि रायशुमारी के दस्तावेज में इस बात का ध्यान रखा गया है कि निजी जानकारियों को साझा करने के मामले में लोगों की प्रतिक्रिया कैसी है।
बिल का उद्देश्य आतंकवादियों और अपराधियों पर लगाम लगाना
इसकी जरूरत अब इसलिए ज्यादा है, क्योंकि आम जनता को फायदा पहुंचाने वाली एन्क्रिप्शन और इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा सुविधाओं का गलत फायदा आतंकवादी, बाल यौन अपराधी और अन्य आपराधिक संगठन उठा लेते हैं। अपनी गैरकानूनी इलेक्ट्रॉनिक संवाद को वे पासवर्ड के जरिए छुपा लेते हैं। कम्युनिकेशन की आधुनिक तकनीकों का दुरुपयोग करके भी अपराधी पुलिस और जांच एजेंसियों के हत्थे नहीं चढ़ते और ऑर ऑस्ट्रेलिया की सरकार अब इसी खामी को दूर करना चाहती है।
पासवर्ड पुलिस को न देकर आरोपी ने छुपाए अपने अपराध
बिल के पक्ष में सरकार ने एक उदाहरण देकर अपनी बात रखी है। इसके अनुसार एक रेपिस्ट मोबाइल फोन पर मैसेंजर की मदद से नाबालिग लड़कियों को शारीरिक संबंध बनाने के बदले ड्ग देने की बातकर मासूम लड़कियों का शोषण करता था। वह पकड़ा गया और उसका मोबाइल फोन भी पुलिस ने बरामद कर लिया, लेकिन उसने अपना पासवर्ड नहीं बताया। जांच एजेंसियां और पुलिस बेबस हो गईं, क्योंकि अपराधी ने स्नैपचैट और फेसबुक मैसेंजर जैसे एन्क्रिप्टिड कम्युनिकेशन माध्यमों का इस्तेमाल किया था। अगर पुलिस का पासवर्ड मिल जाता, तो वह अपराध से जुड़े प्रूफ के अलावा उन अन्य मासूमों का भी पता कर पाती, जिनका अपराधी ने शोषण किया था।
Published on:
27 Aug 2018 05:09 pm
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