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ब्राजील में 40 करोड़ में बिकी भारतीय नस्ल की गाय, पशुओं की नीलामी में नया रेकार्ड

कीमती मवेशी : 156 साल पहले पहली बार भेजी थी, लगातार बढ़ती गई डिमांड ब्राजील में 40 करोड़ में बिकी भारतीय नस्ल की गाय, पशुओं की नीलामी में नया रेकार्ड

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ब्राजील में 40 करोड़ में बिकी भारतीय नस्ल की गाय, पशुओं की नीलामी में नया रेकार्ड

ब्राजील में 40 करोड़ में बिकी भारतीय नस्ल की गाय

नई दिल्ली. भारत में गायों की औसत कीमत ढाई हजार से 11 हजार रुपए है, लेकिन ब्राजील में एक गाय 40 करोड़ रुपए में बिकी है। पशुओं की नीलामी में इसे नया रेकार्ड बताया जा रहा है। गाय आंध्र प्रदेश के नेल्लोर की ‘वियाटिना-19 एफआइवी मारा इमोविस’ नाम की नस्ल की है। ब्राजील में नीलामी के दौरान इसे 48 लाख डॉलर में खरीदा गया। सफेद फर और कंधों पर विशिष्ट बल्बनुमा कूबड़ वाली यह गाय भारत की मूल निवासी है। ब्राजील में इस नस्ल की काफी डिमांड है। नस्ल का वैज्ञानिक नाम ‘बोस इंडिकस’ है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह भारत के ओंगोल मवेशियों की वंशज है, जो अपनी मजबूती के लिए जानी जाती है। यह खुद को पर्यावरण के हिसाब से ढाल लेती है। यह नस्ल पहली बार 1868 में जहाज से ब्राजील भेजी गई थी। साठ के दशक में कई और गायों को वहां ले जाया गया।

नहीं होता इंफेक्शन, गर्मी की अभ्यस्त
ओंगोल नस्ल के मवेशी काफी गर्म तापमान में भी रह सकते हैं। इनका उपापचय (मेटाबॉलिज्म) मजबूत होने से इनमें किसी तरह का इंफेक्शन नहीं होता। ब्राजील में जमकर गर्मी होती है। इसलिए वहां यह गाय काफी पसंद की जाती है। वहां के लोग इसे आसानी से पाल सकते हैं।

और विकसित किया
इस नस्ल को जेनेटिकली तौर पर और विकसित किया गया है। इससे ऐसी संतान उत्पन्न होने की संभावना है, जो इससे भी बेहतर होगी। ब्राजील में करीब 80 फीसदी गायें ओंगोल नस्ल की हैं।