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माइक पोम्पिओ ने वुहान लैब पर निशाना साधा, कहा- रिसर्च के साथ सैन्य गतिविधियों में भी शामिल थी

अमरीका के पूर्व विदेश मंत्री पोम्पिओ का कहना है कि वे निश्चित रूप से कह सकते हैं कि चीन की लैब के अंदर पीपुल्स लिबरेशन आर्मी अपने प्रयासों में लगी हुई थी।
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नई दिल्ली

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Mohit Saxena

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Updated: 31 May 2021, 10:56 AM IST

mike pompeo

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वॉशिंगटन। कोरोना वायरस (Coronavirus) की उत्पत्ति के मामले में चीनी लैब की गतिविधियों को लेकर एक बार फिर से सवाल उठने लगे हैं। अमरीका के पूर्व विदेश मंत्री माइक पोम्पियो का दावा है कि वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (WIV) सैन्य गतिविधियों में भी शामिल थी। उन्होंने कहा कि लैब से ही कोविड महामारी का जन्म हुआ है।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन तक पहुंच की अनुमति देने से मना किया

पोम्पिओ का कहना है कि वे निश्चित रूप से कह सकते हैं कि लैब के अंदर पीपुल्स लिबरेशन आर्मी अपने प्रयासों में लगी हुई थी। उन्होंने आगे कहा कि वे हमें यह बताने से इनकार करते रहे हैं कि यह क्या था, उन्होंने उनमें से किसी की प्रकृति का वर्णन करने से इनकार कर दिया। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन तक पहुंच की अनुमति देने से मना कर दिया।

एक ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक,चीनी वैज्ञानिकों ने अपने देश में मिलने वाली चमगादड़ से मिले प्राकृतिक वायरस में स्पाइक जोड़े। जिससे यह बेहद घातक और तेजी से फैलने वाले नए कोरोना वायरस बदल गया।

गौरतलब है कि हाल ही में अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कोरोना की उत्पत्ति को लेकर जल्द खुलासा करने की बात कही है। उन्होंने अपनी सिक्रेट एजेंसी को 90 दिनों का वक्त दिया है। इसके बाद से चीन की वुहान लैब के मुद्दे ने जोर पकड़ा है।

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कोरोना वायरस की उत्पत्ति पर स्वतंत्र जांच की मांग अमरीका की नई रिपोर्ट के बाद सामने आई है। इसमें कहा गया है कि वुहान विषाणु विज्ञान संस्थान (डब्ल्यूआईवी) के कुछ शोधकर्ता चीन द्वारा 30 दिसंबर 2019 को कोरोना वायरस के आधिकारिक ऐलान से पहले बीमार पड़ गए थे।

चीन ने निष्पक्ष जांच के सवाल को टाला

गौरतलब है कि बीते दिनों वुहान विषाणु विज्ञान संस्थान (डब्ल्यूआईवी) से कोरोना संक्रमण के लीक होने के आरोपों की निष्पक्ष जांच को मंजूरी देने वाले एक सवाल पर चीन ने जवाब देने से इनकार कर दिया। बीते सप्ताह चीन से इसकी स्वतंत्र जांच कराने की अनुमति मांगी गई थी। मगर उसने जांच कराने के सवाल पर चुप्पी साध ली। वहीं चीन के शोधार्थियों का दावा है कि यह संक्रमण पैंगोलिन (एक प्रकार की छिपकली) से मनुष्य तक पहुंचा है।