मसूद अजहर मामला: आसान नहीं है किसी को ग्लोबल आतंकी घोषित करना, UN में सालों तक बेलने पड़ते हैं पापड़

मसूद अजहर मामला: आसान नहीं है किसी को ग्लोबल आतंकी घोषित करना, UN में सालों तक बेलने पड़ते हैं पापड़

  • सुरक्षा परिषद में लंबी चलती है प्रक्रिया
  • टेक्निकल होल्ड लगाकर चीन ने डाला था अड़ंगा
  • पाकिस्तान के ऊपर अब कार्रवाई करने का दारोमदार

संयुक्त राष्ट्र। मोस्ट वांटेड आतंकी मसूद अजहर ( Masood Azhar ) ग्लोबल टेररिस्ट घोषित हो चुका है। इसके साथ ही भारत का वह मंसूबा पूरा हुआ है जिसके लिए वह लंबे समय से कोशिश कर रहा था। यूं तो देखने और सुनने में यह मामला बड़ा आसान लगता है लेकिन भारत ने इसके लिए एक लम्बी लड़ाई लड़ी है। आपको बता दें कि मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी आसान घोषित करने का तरीका इतना आसान नहीं था। आइए, आपको बताते हैं कि यूएन में किसी शख्स आतंकी घोषित करने की क्या प्रकिया है।

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क्या है ग्लोबल आतंकी घोषित करने का तरीका

किसी भी आतंकी को यूएन द्वारा ग्लोबल आतंकी घोषित करने का फैसला सुरक्षा परिषद करती है। इस परिषद में 5 स्थाई देशों के अलावा 10 अस्थाई देश भी शामिल हैं। अमरीका, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस इसके स्थाई सदस्य हैं। किसी भी व्यक्ति को वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए सभी स्थाई सदस्यों की सहमति जरूरी होती है। इसके लिए एक आवेदन पहले सुरक्षा परिषद के सामने देना होता है। परिषद यह निर्धारित करती है कि कोई मामला सुरक्षा परिषद द्वारा विचार किये जाने लायक है अथवा नहीं। उसके बाद दो विकल्प होते हैं। या तो आवेदनकर्ता देश सीधे यूएनएससी के सामने अपील कर दे या फिर सुरक्षा परिषद की 'प्रस्ताव 1267 समिति' में लाए, जिसे आमतौर पर अलकायदा और आईएसआईएस समिति भी कहते हैं। आवेदनकर्ता देश को इस सूची में ख़ास आतंकी का नाम जुड़वाना होता है। एक बार लिस्ट में नाम आने के बाद व्यक्ति को वैश्विक आतंकी घोषित कर दिया जाता है।

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यूएन में होती है बहस

जिस प्रक्रिया का उल्लेख ऊपर की पंक्तियों में किया गया है, वह इतनी आसान भी नहीं है। जब प्रस्ताव यूएनएससी में लाया जाता है तो परिषद सबसे पहले इसकी वैधता पर विचार करती है। उसके बाद परिषद के स्थाई सदस्य देश उस पर अपनी राय व्यक्त करते हैं। अगर सुरक्षा परिषद के किसी सदस्य देश को आतंकी को वैश्विक आतंकी घोषित करने पर कोई आपत्ति है तो वह इस पर विचार करने के लिए और अधिक समय की मांग कर सकता है। इसे 'टेक्नीकल होल्ड' कहा जाता है। मसूद अजहर के मामले में चीन ने यही किया था। अगर प्रस्ताव होल्ड नहीं हुआ और आतंकी का नाम 1267 में लिस्ट हो गया तो वह तुरंत प्रभाव से वैश्विक आतंकी घोषित हो जाता है। दूसरा तरीका यूएनएससी के सत्र में प्रस्ताव लाने का है। यूएनएससी में प्रस्ताव लाने के बाद सुरक्षा परिषद के देश उस पर विचार करते हैं। अगर सर्वसम्मति नहीं बनी तो इसके लिए बकायदा वोटिंग होती है। संयुक्त राष्ट्र नियमों के मुताबिक ग्लोबल टेररिस्ट जिस देश में रहते हैं उस देश पर इनके खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करने की जिम्मेदारी होती है।

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