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नोबेल शांति से सम्मानित नादिया का खुलासा: रात को अपने लिए ऐसे लड़की चुनते थे आतंकी

नोबेल शांति से सम्मानित नादिया मुराद ने मीडिया के सामने आतंकियों के यौन शोषण का शिकार हुई लड़कियों और महिलाओं का दर्द बयान किया है।
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नई दिल्ली

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Navyavesh Navrahi

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Updated: 7 Oct 2018, 6:08 PM IST

nadia

नोबेल शांति से सम्मानित नादिया का खुलासा: रात को अपने लिए ऐसे लड़की चुनते थे आतंकी

नोबेल शांति पुरस्कार मिलने के बाद इराक की यजीदी महिला नादिया मुराद फिर चर्चा में हैं। मीडिया के सामने उन्होंने आईएसआईएस के आतंकियों के बारे में चौंकाने वाली बातें कहीं हैं। युद्ध के दौरान यौन हिंसा का शिकार हुईं महिलओं के लिए काम करने वाली नादिया ने मीडिया को बताया कि इराक और सीरिया में कैसे उन जैसी हजारों लड़कियों का जीवन आईएस ने नर्क से भी बदतर बना दिया था। यही बात बाद में आतंकियों के खिलाफ उसका सबसे बड़ा हथियार बनी।

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नादिया के अनुसार- आईएसआईएस के गढ़ में रात को रोज दासी बनाई गई महिलाओं और लड़कियों का बाजार लगता था। ये जगह किसी घर के नीचे हंगामे वाली होती थी, क्योंकि यहां बहुत सारे आतंकी इकट्ठे होते थे। जब भी किसी लड़की को लेने के लिए आतंकी वहां घुसता तो लड़कियां शोर मचाने लगतीं। यह बिलकुल युद्ध जैसे हालात होते थे। यहां तक कि कई लड़कियां वहां पर उलटियां करने लगतीं, लेकिन आतंकियों को इससे काई फर्क नहीं पड़ता था। वे चारों ओर घूमकर अपने लिए सबसे खूबसूरत लड़की चुनते।

नादिया के अनुसार- इसके बाद वह चुनी हुई लड़की के बाल और मुंह देखते और वहां मौजूद गार्ड से पूछते ये कुंवारी है? इसके बाद वे लड़कियों के दाम ऐसे लगाते, जैसे दुकान से कोई सामान खरीद रहे हों। फिर वे हमारे अंगों को छूकर देखते। उनके हाथ तेजी से हमारी छाती और टांगों पर घूमते, जैसे हम इंसान न होकर कोई जानवर हों।

नादिया मुराद ने बताया कि- 'आतंकी लड़कियों को वहशी नजरों से देखते। इसके बाद अरबी या तुर्कमान में कुछ कहते। हमारी चीखें दोगुनी हो जातीं। आतंकी मुझे तेजी से छूने की कोशिश करते। मैं खुद को उनके हाथों से बचाने की कोशिश करती। वहां मौजूद दूसरी लड़कियां भी घेरा बनाकर एक-दूसरी को बचाने का प्रयास करतीं। हालांकि वहां बचने का कोई रास्ता नहीं था।

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आईएस की सेक्स नीति का खुलासा

नादिया ने आईएस की सेक्स दासी बनाने की नीति का खुलासा भी किया। नादिया के अनुसार- 'ईराक के उत्तरी हिस्से सिंजर में यजीदी लड़कियों को सेक्स दासी बनाना यूं ही नहीं है। इसके लिए पूरी रणनीति बनाई गई थी कि किस तरह किसी यजीदी के घर पर धावा बोलना है। कौन-सी लड़की को उठाना है। इसके लिए वे ‘सबाया’ शब्द का इस्तेमाल करते थे। आतंकी अपने मनपसंद सैनिकों को ये लड़कियां पेश करते थे। इतना ही नहीं आईएस की ओर से अपने मैगजीन में इस बात का प्रचार करके नए लोगों को भर्ती किया जाता था। वे लड़कियों का लालच देकर लोगों को अपने साथ जोड़ते थे।'

खूंखार दिखने वाले आतंकी के साथ न जाने की जिद

नादिया ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि कैसे उसने एक खूंखार दिखने वाले आतंकी के साथ जाने से इनकार किया था। नादिया के अनुसार- किसी आतंकी को लड़की चाहिए होती, तो लड़की के नाम के साथ उस आतंकी का नाम रजिस्टर में लिखा जाता था। आईएस के इसी बाजार में एक बार लगा कि उन्हें वहां के खूंखार दिखने वाले आतंकी सालवान के साथ जाना होगा। वे आम आदमी की तरह नहीं दिखता था, बल्कि दैत्य की तरह लगता था। उसके बारे में सोचकर ही मैं सिहर उठी। उसके साथ जाने का मतलब था मौत के मुंह में जाना। मैंने एक दूसरे आतंकी के पैर पकड़ लिए और कहा कि वे सालवान के साथ नहीं, उसके साथ जाएगी।

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तब उस आतंकी ने सालवान से कहा कि- ये लड़की बहुत छोटी है। इसके बाद वह मुझे रजिस्टर के पास लेकर गया। पता चला कि नादिया के साथ सालवान का नहीं किसी दूसरे आतंकी का नाम लिखा था। बता दें, नादिया कई दिनों तक आईएसआईएस की बंदी रही हैं। साल 2015 में उन्होंने पहली बार संयुक्त राष्ट्र के मंच से अपनी कहानी पूरी दुनिया को बताई।